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कौन हैं तारिक रहमान? निर्वासन से PM तक की सफर

विदेश डेस्क- ऋषि राज |

ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में इन दिनों जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है तारिक रहमान। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की हालिया चुनावी सफलता के बाद उनका प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। करीब 17 साल के निर्वासन के बाद उनकी वापसी ने न केवल पार्टी में नई ऊर्जा भरी है, बल्कि देश की राजनीति में भी बड़ा बदलाव संकेतित किया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर तारिक रहमान कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है।

तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को हुआ। वह बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। राजनीतिक परिवार में जन्म लेने के कारण उनका रुझान शुरू से राजनीति की ओर रहा। 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, जब वह महज चार साल के थे, तब उन्हें अपनी मां और भाई के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था। BNP उन्हें उस दौर का सबसे कम उम्र का राजनीतिक कैदी बताती है।

उन्होंने ढाका के बीएएफ शाहीन कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में ढाका विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की। 1980 के दशक के अंत में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1988 में BNP के जनरल मेंबर बने। धीरे-धीरे संगठन में उनकी भूमिका बढ़ती गई और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

1991 में जब खालिदा जिया देश की प्रधानमंत्री बनीं, तब चुनाव प्रचार और संगठनात्मक रणनीति में तारिक रहमान की बड़ी भूमिका मानी जाती है। 1993 में उन्होंने डॉक्टर जुबैदा रहमान से विवाह किया, जो एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार से आती हैं। इसके बाद वह BNP की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे और सीनियर वाइस-चेयरमैन तथा अन्य महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

हालांकि उनका राजनीतिक करियर विवादों से भी घिरा रहा। 2004 के ढाका ग्रेनेड हमले के मामले में उनका नाम सामने आया और बाद में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों में 2007 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2008 में जमानत मिलने के बाद वह इलाज के लिए लंदन चले गए और लंबे समय तक वहीं निर्वासन में रहे। 2018 में उन्हें एक मामले में उम्रकैद की सजा भी सुनाई गई थी, जबकि भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य मामलों में भी आरोप लगे। लेकिन 2024 के बाद बदली राजनीतिक परिस्थितियों में उन्हें कई मामलों से राहत मिली और उनकी सक्रिय वापसी का रास्ता साफ हुआ।

बांग्लादेश में हाल के वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और सत्ता परिवर्तन की घटनाओं ने BNP के लिए अवसर पैदा किया। विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान की वापसी से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा और मतदाताओं के बीच नया संदेश गया। इसी पृष्ठभूमि में हुए चुनाव में BNP ने मजबूत प्रदर्शन किया।

अब पार्टी की जीत के बाद तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। उनके समर्थक उन्हें एक अनुभवी और मजबूत नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उनके पुराने विवादों को लेकर सवाल उठाते हैं। बावजूद इसके, यह स्पष्ट है कि निर्वासन से लौटकर देश की सर्वोच्च राजनीतिक जिम्मेदारी तक पहुंचने का उनका सफर दक्षिण एशियाई राजनीति की एक महत्वपूर्ण कहानी बन गया है। आने वाले समय में उनका नेतृत्व बांग्लादेश की दिशा और राजनीतिक स्थिरता तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।