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खाप पंचायत का फरमान, स्मार्टफोन और हाफ पैंट पर रोक

स्टेट डेस्क, नीतीश कुमार।

बागपत। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत में हुई खाप चौधरियों की महापंचायत अपने कड़े सामाजिक निर्णयों को लेकर चर्चा में है। पंचायत ने किशोर लड़के–लड़कियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल और हाफ पैंट पहनने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही विवाह आयोजनों के लिए नई गाइडलाइन तय की है। खाप का कहना है कि ये फैसले पश्चिमी प्रभाव को सीमित करने और पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से लिए गए हैं।

निर्देशों के अनुसार 18 से 20 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए स्मार्टफोन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। लड़कों और लड़कियों—दोनों के लिए हाफ पैंट (बरमूडा) पहनने पर रोक लगाई गई है। वहीं, शादियों को मैरिज हॉल के बजाय गांव या घर पर आयोजित करने की सलाह दी गई है। विवाह में मेहमानों की संख्या सीमित रखने, अनावश्यक खर्च से बचने और व्हाट्सएप के माध्यम से निमंत्रण भेजने पर जोर दिया गया है।

खाप सदस्य चौधरी ब्रजपाल सिंह ने कहा कि समाज का निर्णय सर्वोपरि है। उनके अनुसार बच्चों को परिवार और बुजुर्गों के साथ रहकर उचित शिक्षा और सामाजिक मार्गदर्शन मिलना चाहिए। “18–20 साल के बच्चों को फोन की जरूरत नहीं है,” उन्होंने कहा और बताया कि फैसलों के पालन के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

दगड़ खाप के चौधरी ओमपाल सिंह ने भी इन निर्णयों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कम उम्र में मोबाइल देने से गलत आदतें लग सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम केवल लड़कियों पर नहीं, बल्कि लड़कों पर भी समान रूप से लागू होंगे और मोबाइल का उपयोग घर तक ही सीमित रहना चाहिए।

पंचायत में यह भी तय किया गया कि समाज में मर्यादा बनाए रखने के लिए पहनावे में सादगी जरूरी है। लड़कों को फुल पैंट या पारंपरिक कुर्ता–पजामा पहनने की सलाह दी गई है। शादियों में बढ़ते खर्च और रिश्तों में आ रही दूरी पर चिंता जताते हुए खाप ने कहा कि पारंपरिक तरीके से घर पर होने वाले विवाह सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं।

चौधरी ब्रजपाल सिंह धामा ने संकेत दिया कि ये फैसले केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेंगे। अन्य खापों से संपर्क कर इन्हें पूरे उत्तर प्रदेश में लागू कराने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि उद्देश्य युवाओं को संस्कारों और संस्कृति से जोड़ना है, ताकि समाज में अनुशासन और मर्यादा बनी रहे।