नेशनल डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।
ग्लासगो: पंजाब के एक छोटे से गांव की बेटी हरजिंदर कौर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाल दिया। छोटे किसान परिवार से आने वाली हरजिंदर ने महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम (101+126) भार उठाकर पोडियम पर जगह बनाई। उनकी यह सफलता सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे का परिणाम है।
छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
पंजाब के पटियाला जिले के नाभा के पास स्थित एक गांव में जन्मीं हरजिंदर कौर के पिता साहिब सिंह छोटे किसान हैं। परिवार की आजीविका खेती और मजदूरी पर निर्भर रही। आर्थिक संसाधन सीमित थे, लेकिन परिवार ने कभी उनकी मेहनत और सपनों के बीच हालात को दीवार नहीं बनने दिया। यही भरोसा हरजिंदर को लगातार आगे बढ़ाता रहा।
खेतों की मेहनत बनी सबसे बड़ी ताकत
हरजिंदर की ताकत किसी आधुनिक जिम में नहीं, बल्कि खेतों में रोज की मेहनत से तैयार हुई। बचपन में वह पशुओं के लिए चारा काटने वाली हाथ से चलने वाली टोका मशीन का भारी लोहे का पहिया घंटों घुमाती थीं। इसी मेहनत ने उनकी कलाई, बाजुओं, कंधों और पीठ को मजबूत बनाया। बाद में यही ताकत वेटलिफ्टिंग में उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी।
कबड्डी से शुरू हुआ सफर, कोच की नजर ने बदल दी जिंदगी
हरजिंदर ने खेल जीवन की शुरुआत कबड्डी से की। इसके बाद पंजाबी यूनिवर्सिटी में उन्होंने रस्साकशी टीम का हिस्सा बनकर अपनी मजबूत ग्रिप और शारीरिक क्षमता से सभी को प्रभावित किया। वर्ष 2016 में कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता और कोच परमजीत शर्मा की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने हरजिंदर को वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी। पहली बार बारबेल उठाने के बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
छह की छह लिफ्ट सफल, करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में हरजिंदर ने आत्मविश्वास और संयम के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 227 किलोग्राम का करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि उन्होंने प्रतियोगिता की अपनी सभी छह लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी कीं और सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
मेडल जीतने के बाद सबसे पहले मां को किया फोन
मेडल जीतने के बाद हरजिंदर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह अपने प्रदर्शन से बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान वह क्लीन एंड जर्क में इससे अधिक वजन उठा चुकी हैं, लेकिन प्रतियोगिता में सभी छह लिफ्ट सफल रहना उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि की बात रही।
उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को वह अपने परिवार को समर्पित करती हैं। हरजिंदर ने परिवार और भारतीय वेटलिफ्टिंग महासंघ के सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी बताया कि हर बार की तरह इस बार भी मेडल जीतने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपनी मां को फोन कर खुशखबरी दी।
गोल्ड और ब्रॉन्ज पर किसने जमाया कब्जा?
इस स्पर्धा में कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने कुल 240 किलोग्राम (108+132) भार उठाकर गोल्ड मेडल जीता। वहीं ऑस्ट्रेलिया की न्या फीबे हेमैन ने कुल 218 किलोग्राम (97+121) वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। हरजिंदर का 227 किलोग्राम का प्रदर्शन उन्हें सिल्वर दिलाने के लिए पर्याप्त रहा।







