स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।
मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना से 2,078 बसावटें पक्की सड़क से जुड़ीं
- सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित करके रखी गईं लगभग 11 हजार बसावटें
- 8 हजार 33 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण की मिली प्रशासनिक स्वीकृति
- कुल 2 हजार 78 बसावटें पक्की सड़क से जुड़ीं
पटना, बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और हर छोटे-बड़े टोलों को सुगम यातायात की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ग्रामीण कार्य विभाग लगातार कार्यरत है। मार्च तक राज्य की छुटी हुई 2 हजार 78 बसावटें सड़क मार्ग से जुड़ गई हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना (अवशेष) के तहत 100 या उससे अधिक आबादी वाले छूटे हुए ग्रामीण टोलों और बसावटों को पक्की सड़कों से जोड़ने के लक्ष्य के साथ राज्यभर में ग्रामीण सडकों का तेजी से निर्माण किया जा रहा है। इस योजना से वर्षों से पक्की सड़क की राह देख रहे लाखों ग्रामीणों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है।
ग्रामीण कार्य विभाग के स्तर से राज्य के सभी जिलों में छूटी हुई बसावटों की पहचान करने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण कराया गया है। इस सर्वेक्षण के आधार पर राज्यभर में कुल 11 हजार 20 ऐसी बिना संपर्क वाले बसावटों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें मुख्य मार्गों से जोड़ा जाना है। इन सभी चिन्हित टोलों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्रदान करने के लिए विभाग ने कुल 14,002 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित है।
इस लक्ष्य को धरातल पर उतारने को लेकर बेहद तेज गति से कार्य किया जा रहा है। इस दिशा में अब तक कुल 6,076 बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ने की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। इसके तहत कुल 8,033.23 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जाना है। उल्लेखनीय है कि अबतक कुल 2,078 बसावटों तक पक्की सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। जिसके तहत 2,210 किलोमीटर पक्की ग्रामीण सड़कों का निर्माण सुनिश्चित किया जा चुका है।
पूर्वी चंपारण में सर्वाधिक 239 बसावटों को पक्की सडक से जोड़ा गया
योजना के जिलावार प्रदर्शन के मामले में पूर्वी चंपारण जिले में सबसे तेजी से कार्य किया गया है, जहां सर्वाधिक 239 बसावटों को 300 किलोमीटर पक्की सड़क से जोड़ा जा चुका है। वहीं कैमूर में 195, औरंगाबाद में 161 और दक्षिण बिहार के गया में 149 बसावटों तक निर्बाध संपर्कता सुनिश्चित की जा चुकी है। इन पक्की ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिल रही है। ग्रामीण कार्य विभाग शेष बची हुई बसावटों के लिए भी तय समय-सीमा के अन्दर पक्की सड़कों का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।







