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ग्रेटर नोएडा सोसाइटी में मेंटेनेंस चार्ज बढ़ोतरी पर भड़के निवासी

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

ग्रेटर नोएडा पश्चिम, सुपरटेक इकोविलेज-वन सोसाइटी में मेंटेनेंस शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी को लेकर निवासियों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। सैकड़ों की संख्या में सोसाइटीवासियों ने एकजुट होकर फैसिलिटी प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और बढ़े हुए शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए प्रबंधन के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई।

प्रदर्शन में शामिल निवासियों का कहना है कि मेंटेनेंस शुल्क में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई है, जबकि इस संबंध में उनसे कोई राय नहीं ली गई और न ही उन्हें पहले से कोई संतोषजनक जानकारी दी गई। उनका आरोप है कि बिना सहमति के लिया गया यह फैसला पूरी तरह अनुचित है और इससे हजारों परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

सोसाइटीवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि जिस स्तर की सुविधाओं और सेवाओं का वादा किया जाता है, वे जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देती हैं। उनका कहना है कि कई बुनियादी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, लेकिन उन्हें दूर करने के बजाय प्रबंधन ने शुल्क बढ़ाने का निर्णय ले लिया। इसी वजह से लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मेंटेनेंस शुल्क में बढ़ोतरी का कोई ठोस औचित्य अब तक सामने नहीं रखा गया है। निवासियों के अनुसार, जब तक सुविधाओं की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार नहीं होता और खर्चों का पारदर्शी ब्यौरा नहीं दिया जाता, तब तक इस तरह की बढ़ोतरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रबंधन से पूरे मामले पर खुलकर जवाब देने की मांग की।

सोसाइटी के कई निवासियों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच पहले से ही घरेलू बजट पर दबाव है। ऐसे में एक साथ इतनी बड़ी वृद्धि करना आम परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। उनका मानना है कि किसी भी आर्थिक निर्णय से पहले निवासियों के साथ चर्चा और सहमति जरूरी है।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रबंधन से बढ़े हुए शुल्क को वापस लेने और निवासियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समाधान निकालने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

फिलहाल, मेंटेनेंस शुल्क बढ़ोतरी को लेकर सोसाइटी में असंतोष का माहौल बना हुआ है। निवासी प्रबंधन से पारदर्शिता, बेहतर सुविधाएं और शुल्क वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। वहीं, सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रबंधन इस विरोध के बाद क्या रुख अपनाता है।