लोकल डेस्क, एन के सिंह।
अब खेल और शिक्षा से संवरेगा युवाओं का भविष्य। नशा मुक्ति प्रभात फेरी' के जरिए एसपी ने खुद संभाली कमान, नारों और जागरूकता से कांपे नशे के अवैध कारोबारी।
पूर्वी चंपारण: चंपारण की धरती पर इन दिनों खाकी का एक ऐसा स्वरूप देखने को मिल रहा है, जिसने न केवल अपराधियों की नींद उड़ा दी है, बल्कि आम जनमानस के दिलों में उम्मीद की एक नई लौ जला दी है। जिले के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात अब एक ऐसी निर्णायक जंग के सेनापति बने हैं, जिसका लक्ष्य किसी गिरोह का खात्मा नहीं, बल्कि समाज की जड़ों को दीमक की तरह चाट रहे 'नशे' का समूल नाश करना है। पुलिस सप्ताह के विशेष अवसर पर मोतिहारी की सड़कों पर उतरी पुलिस की टोली यह संदेश दे रही है कि पुलिस केवल डंडा चलाने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सच्ची रक्षक और मार्गदर्शक भी है।
नशा मुक्ति की गूँज, जब नारों से थर्राया नशे का कारोबार
अभियान का शंखनाद करते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्वयं पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर से 'नशा मुक्ति प्रभात फेरी' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह केवल एक सरकारी मार्च नहीं था, बल्कि युवाओं को मौत के दलदल से बाहर निकालने का एक आह्वान था। शहर के मुख्य चौक-चौराहों से गुजरती इस रैली में पुलिस के जवानों और पदाधिकारियों ने बुलंद आवाज में नारा लगाया— "सूखा नशा और शराब से दूरी, जीवन में खुशहाली जरूरी।" इस गूँज ने न केवल राहगीरों को रुकने पर मजबूर किया, बल्कि नशे के अवैध कारोबारियों को भी कड़ा संदेश दे दिया कि अब चंपारण की जवानी को बर्बाद करने की छूट किसी को नहीं मिलेगी।
अपराध पर प्रहार के साथ सामाजिक सरोकार
विगत कुछ समय में अपराधियों के छक्के छुड़ाने वाले स्वर्ण प्रभात का मानना है कि अपराध को जड़ से मिटाने के लिए उन कारणों पर चोट करना जरूरी है जो युवाओं को गलत रास्ते पर धकेलते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "नशा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और सामाजिक ताने-बाने को तबाह कर देता है। हमारा लक्ष्य चंपारण के युवाओं को नशे की गर्त से निकालकर बेहतर भविष्य की ओर ले जाना है।"
इस विजन के तहत पुलिस अब केवल थानों तक सीमित नहीं है। एसपी की इस मुहिम में शिक्षा और खेल को मुख्य हथियार बनाया गया है। युवाओं की असीम ऊर्जा को विध्वंसक रास्तों से मोड़कर खेल के मैदानों और पुस्तकालयों की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस सप्ताह के दौरान आयोजित खेल प्रतियोगिताएं इसी का हिस्सा हैं, ताकि युवा शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बन सकें।
अभिभावकों से भावनात्मक जुड़ाव और जन-भागीदारी
एसपी स्वर्ण प्रभात ने इस लड़ाई में समाज के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ यानी 'माता-पिता' से भी भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि पुलिस अपना काम करेगी, लेकिन बच्चों की आदतों पर पहली नजर अभिभावकों की होनी चाहिए। उन्हें अपने बच्चों को समय देना होगा और उन्हें खेल व शिक्षा के प्रति प्रेरित करना होगा। इस अपील का असर भी दिखने लगा है; आज पुलिस के इस अभियान में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और आम नागरिक कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, जो पुलिस-पब्लिक तालमेल की एक बेमिसाल तस्वीर पेश करता है।
बदलाव की नई बयार
मोतिहारी पुलिस का यह 'मानवीय चेहरा' जिले में भरोसे की एक नई लहर लेकर आया है। लोग अब पुलिस को डर की नजर से नहीं, बल्कि मदद और सुरक्षा की नजर से देख रहे हैं। 'सूखा नशा' यानी स्मैक और चरस जैसे जहर के खिलाफ शुरू हुई यह जंग अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। आने वाले दिनों में पुलिस सप्ताह के तहत और भी कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो न केवल चंपारण को नशा मुक्त बनाएंगे, बल्कि इसे अपराध मुक्त करने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होंगे।







