विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
प्योंगयांग : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने मंगलवार को दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी मित्रता को और मजबूत बनाने तथा इसे आने वाली पीढ़ियों तक आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि चीन और उत्तर कोरिया के संबंध साझा इतिहास, पारस्परिक सहयोग और संघर्ष के दौर में विकसित हुए भरोसे पर आधारित हैं, जिन्हें भविष्य में भी उसी मजबूती के साथ कायम रखा जाएगा।
चीन-उत्तर कोरिया फ्रेंडशिप टॉवर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दोनों नेताओं ने उन सैनिकों और शहीदों को सम्मान दिया जिन्होंने 1950 के दशक में दोनों देशों के बीच सहयोग और साझी लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वह दौर दोनों देशों के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसकी स्मृतियां आज भी दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती हैं।
कार्यक्रम के दौरान शी जिनपिंग और किम जोंग उन ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक मित्रता केवल राजनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक और वैचारिक जुड़ाव का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस रिश्ते को और सशक्त बनाने के लिए युवाओं को साझा इतिहास और दोनों देशों के सहयोग की विरासत से परिचित कराना आवश्यक है।
दोनों नेताओं ने तथाकथित ‘अमेरिकी आक्रामकता के विरोध’ की भावना को जीवित रखने और नई पीढ़ी को इसके बारे में शिक्षित करने का भी संकल्प व्यक्त किया। उनका कहना था कि इतिहास से मिली सीख और संघर्षों की स्मृतियां दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
इससे पहले शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ प्योंगयांग स्थित चीन-उत्तर कोरिया फ्रेंडशिप टॉवर पहुंचे, जहां उन्होंने चीनी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल जू भी मौजूद रहीं। समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया और ऐतिहासिक संबंधों को याद किया।
यात्रा के दौरान शी जिनपिंग और किम जोंग उन ने वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के सेंट्रल कैडर्स ट्रेनिंग स्कूल का संयुक्त दौरा भी किया। यहां दोनों नेताओं ने मिलकर देवदार का एक पौधा रोपा और इसे चीन-उत्तर कोरिया संबंधों की स्थायी मित्रता और निरंतर सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पौधा आने वाले वर्षों में दोनों देशों की अटूट दोस्ती, आपसी विश्वास और साझा विकास की भावना को दर्शाता रहेगा।
दोनों नेताओं की मुलाकात और संयुक्त कार्यक्रमों को चीन तथा उत्तर कोरिया के बीच रणनीतिक और राजनीतिक संबंधों को नई ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक और कूटनीतिक संदेश दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत करने में सहायक साबित होंगे।







