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चुनाव से पहले आर.के. सिंह की बगावत: BJP छोड़ नई पार्टी बनाने के संकेत

स्टेट डेस्क, वेरोनिका राय |

बिहार की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी हलचल पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद राज कुमार सिंह (आर.के. सिंह) के बयानों से पैदा हुई है। चुनावी माहौल बनने से पहले ही आर.के. सिंह ने पार्टी से नाराज़गी खुलकर जाहिर कर दी है और अब नई पार्टी बनाने के संकेत देकर सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।

आर.के. सिंह, जो कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए थे, भाजपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचे और केंद्र में मंत्री भी रहे। लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि या तो उन्हें भाजपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा या वे खुद नया राजनीतिक रास्ता तलाश लेंगे।

भाजपा नेताओं पर सीधा हमला

सोमवार से ही आर.के. सिंह लगातार पार्टी नेताओं पर बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को निशाने पर लिया और कहा कि ये दोनों नेता प्रशांत किशोर के आरोपों का जवाब दें या फिर अपने पद से इस्तीफा दें। इस बयान ने साफ कर दिया कि उनका झगड़ा अब भीतर-भीतर नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है।

आरा में नई पार्टी पर चर्चा

मंगलवार को आरा में आयोजित एक बैठक में आर.के. सिंह ने अपने समर्थकों से सीधे सवाल किया –
“क्या हम लोग अपनी अलग पार्टी बनाएं? इस पर आप लोग विचार कर लें, विचार करके बतावें।”

यह सवाल महज़ एक विचार नहीं बल्कि राजनीतिक संकेत माना जा रहा है कि आर.के. सिंह भाजपा से दूरी बनाने का मन बना चुके हैं। बैठक आरा के बाबू बाजार स्थित क्षत्रिय कल्याण संगठन के कार्यालय के उद्घाटन मौके पर हुई थी। इस दौरान उन्होंने खासतौर पर राजपूत समाज से एकजुट होने की अपील की और इशारों-इशारों में यह जताया कि नई पार्टी का आधार जातीय एकजुटता भी हो सकती है।

आर.के. सिंह का राजनीतिक सफर

राज कुमार सिंह लंबे समय तक देश के गृह सचिव रहे। रिटायरमेंट के बाद वे भाजपा में शामिल हुए और बिहार से लोकसभा चुनाव जीते। नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें ऊर्जा मंत्रालय जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी भी मिली। शुरुआत में पार्टी और सरकार से उनकी नजदीकियां काफी मजबूत रहीं, लेकिन पिछले कुछ सालों में वे धीरे-धीरे संगठन से अलग-थलग पड़ते चले गए।

भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ीं

बिहार में पहले से ही भाजपा और जदयू के रिश्ते उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। ऐसे में आर.के. सिंह जैसे कद्दावर नेता की बगावत चुनावी गणित बिगाड़ सकती है। खासकर आरा और आसपास के इलाकों में उनकी अच्छी पकड़ है और राजपूत समाज पर उनका असर माना जाता है। यदि वे अलग पार्टी बनाते हैं, तो भाजपा का वोट बैंक खिसक सकता है।

आगे क्या?

अब सवाल यह है कि भाजपा खुद उन्हें बाहर करेगी या वे पार्टी छोड़कर नई राह चुनेंगे। उनके हालिया बयानों और समर्थकों से किए गए परामर्श से यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे जल्द ही बड़ा ऐलान कर सकते हैं।

बिहार की राजनीति में आर.के. सिंह का अगला कदम चुनाव से पहले नए समीकरण बनाएगा। भाजपा को जहां अंदरूनी कलह से निपटना होगा, वहीं विपक्ष भी इस स्थिति पर पैनी नज़र रखे हुए है।