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जन नायक: याचिका वापसी, सेंसर बोर्ड समिति को हरी झंडी

एंटरटेनमेंट डेस्क, मुस्कान कुमारी।

चेन्नई। विजय अभिनीत फिल्म 'जन नायक' के निर्माता ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के खिलाफ दायर रिट याचिका मद्रास हाईकोर्ट से वापस लेने का फैसला किया है। अब मामला रिवाइजिंग कमिटी के पास जाएगा, जिसकी सुनवाई मंगलवार को जस्टिस पी.टी. आशा के समक्ष होगी।

निर्माण कंपनी केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी ने कोर्ट रजिस्ट्री को पत्र देकर याचिका वापसी की इच्छा जाहिर की। वकील विजयन सुब्रमण्यम ने बताया कि क्लाइंट अब लिटिगेशन जारी नहीं रखना चाहते। फैक्ट चेक से पुष्टि हुई कि ये कदम सीबीएफसी चेयरमैन प्रसून जोशी के 6 जनवरी 2026 के फैसले के बाद आया, जब फिल्म को रिवाइजिंग कमिटी भेजा गया—ये निर्णय ई-सिनेप्रमाण पोर्टल पर अपलोड भी हो चुका है।

सेंसर विवाद ने बढ़ाई रिलीज में देरी

फिल्म मूल रूप से 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सीबीएफसी की मॉनिटरिंग कमिटी के एक सदस्य की शिकायत ने सबकुछ उलट-पुलट कर दिया। 19 दिसंबर 2025 को पांच सदस्यीय एग्जामिनेशन कमिटी ने फिल्म देखी और 22 दिसंबर को यू/ए 16+ सर्टिफिकेट की सिफारिश की, कुछ कटिंग्स के साथ। केवीएन ने सुझाव मान लिए और एडिटेड वर्जन 24 दिसंबर को दोबारा जमा किया।

लेकिन शिकायत में आरोप लगाया गया कि फिल्म में विदेशी ताकतों द्वारा भारत में धार्मिक संघर्ष भड़काने वाले दृश्य और संवाद हैं, जो धार्मिक सद्भाव बिगाड़ सकते हैं। साथ ही, आर्मी से जुड़े संदर्भ हैं, लेकिन कमिटी में डिफेंस एक्सपर्ट नहीं था। शिकायतकर्ता, जो एडवाइजरी पैनल मेंबर हैं, ने कहा कि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया—ये सिनेमेटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन है। फैक्ट चेक: ये शिकायत 29 दिसंबर 2025 को मुंबई पहुंची, जिसके बाद चेन्नई रीजनल ऑफिस को होल्ड करने का आदेश मिला।

हाईकोर्ट की लंबी कानूनी जंग

5 जनवरी 2026 को निर्माताओं को रिवाइजिंग कमिटी रेफरेंस की सूचना दी गई। इससे पहले ही केवीएन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 24 घंटे में सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की। जस्टिस पी.टी. आशा ने 7 जनवरी को रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया और 9 जनवरी को याचिका मंजूर करते हुए यू/ए 16+ सर्टिफिकेट का निर्देश दिया।

लेकिन सीबीएफसी ने उसी दिन डिवीजन बेंच में अपील की, जहां चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन ने सिंगल जज के आदेश पर स्टे दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। 20 जनवरी को फाइनल हियरिंग हुई, और 27 जनवरी को बेंच ने सिंगल जज के आदेश रद्द कर मामला रीमैंड कर दिया—कहा कि काउंटर अफिडेविट का मौका नहीं मिला। निर्माताओं को प्रेयर संशोधित करने की छूट दी गई, लेकिन उन्होंने न तो संशोधन किया और न ही सुप्रीम कोर्ट गए।

अब वापसी के साथ फिल्म का भविष्य रिवाइजिंग कमिटी के नौ सदस्यों पर टिका है। तमिल सिनेमा जगत में ये विवाद रिलीज में देरी से नाराजगी पैदा कर चुका है, जहां धार्मिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे सेंसर प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं।