नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली:भारत के कृषि और समुद्री निर्यात क्षेत्र के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। यूरोपीय संघ (EU) ने अपने संशोधित नियामक ढांचे के तहत सितंबर 2026 की समयसीमा के बाद भी भारत को एक्वाकल्चर उत्पाद (मछली), अंडे, शहद और एनिमल केसिंग (animal casings) का निर्यात जारी रखने वाले देशों की अधिकृत सूची में शामिल कर लिया है। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को बिना किसी रुकावट के यूरोपीय बाजारों में अपनी पैठ बनाए रखने में मदद मिलेगी।
यह विकास मुख्य रूप से रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance - AMR) को लेकर यूरोपीय संघ की बढ़ती चिंताओं के बीच हुआ है। यूरोपीय संघ ने अपने पुराने नियम (EU) 2021/405 में संशोधन करते हुए नए कड़े प्रावधान लागू किए हैं, जो सितंबर 2026 से प्रभावी होने जा रहे हैं। इन नए नियमों के तहत पशु मूल के उत्पादों का निर्यात करने वाले देशों के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा के अतिरिक्त मानक तय किए गए हैं। यदि भारत को इस सूची में जगह नहीं मिलती, तो सितंबर 2026 के बाद भारत से होने वाले इन खाद्य पदार्थों के निर्यात पर संकट मंडरा सकता था। लेकिन भारत के मजबूत नियंत्रण तंत्र को देखते हुए यूरोपीय संघ ने इसे हरी झंडी दे दी है।
यह मंजूरी भारत के मत्स्य पालन (Fisheries) और एक्वाकल्चर क्षेत्र के लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत से यूरोपीय संघ को होने वाला मछली और मत्स्य उत्पादों का निर्यात लगभग 1.59 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 13,200 करोड़ रुपये) आंका गया है। इस मंजूरी के बाद करोड़ों डॉलर का यह व्यापारिक बाजार भारतीय मछुआरों और निर्यातकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। मत्स्य पालन के अलावा शहद और पोल्ट्री (अंडा) उद्योग से जुड़े छोटे और बड़े व्यापारियों के लिए भी यूरोपीय संघ का यह फैसला नए रास्ते खोलेगा और वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की साख बढ़ाएगा।
इस बड़ी कूटनीतिक और व्यापारिक सफलता के पीछे भारत सरकार के वाणिज्य विभाग और निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) के अथक प्रयास रहे हैं। पिछले काफी समय से भारतीय वाणिज्य विभाग यूरोपीय आयोग के साथ इन नियामक आवश्यकताओं और बाजार पहुंच के मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहा था। यूरोपीय संघ के कड़े नियमों को ध्यान में रखते हुए, ईआईसी (EIC) ने भारत की आधिकारिक नियंत्रण प्रणाली (Official Control System) को मजबूत किया। इसके तहत देश में निर्यात होने वाले खाद्य पदार्थों की कड़ाई से जांच, परीक्षण (testing) और प्रमाणन (certification) की प्रक्रियाओं को यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, आने वाले समय में भी वाणिज्य विभाग, निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) और समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) जैसी संस्थाएं यूरोपीय संघ द्वारा अनुमोदित प्रतिष्ठानों और नियामक अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्यात होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों में कोई कमी न आए। सरकार के इस कदम से न केवल निर्यात में निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि भविष्य में व्यापार वृद्धि के नए अवसर पैदा होंगे और भारत-यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग और अधिक मजबूत होगा।







