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जाली जमीन दस्तावेज पर सख्ती, सीओ पर बढ़ी जवाबदेही

स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।

सहरसा: जाली भूमि दस्तावेजों के आधार पर सरकारी कार्य कराने के मामलों में अब अंचलाधिकारी (सीओ) की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नया आदेश जारी करते हुए ऐसे मामलों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, यदि प्राथमिकी दर्ज नहीं होती है तो संबंधित अंचलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि जाली दस्तावेज से जुड़े मामलों में छह विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। सरकारी भूमि से संबंधित मामलों में यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो अंचलाधिकारी स्वयं थाने में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे।

वहीं, रैयती या निजी भूमि को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति में पहले जांच की जाएगी। जांच के बाद अंचलाधिकारी या राजस्व अधिकारी की अनुशंसा पर परिवादी अथवा शिकायतकर्ता द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इस प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर इसे लापरवाही और कदाचार की श्रेणी में रखा जाएगा।

विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि जाली दस्तावेज से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का आदेश जारी न किया जाए। साथ ही, यदि पूर्व में ऐसे दस्तावेजों के आधार पर कोई आदेश पारित किया गया है, तो उसकी समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाएगी।

इस संबंध में सीओ मौनी बहन ने बताया कि विभागीय निर्देश के आलोक में पुराने मामलों की समीक्षा की जा रही है और इसके लिए संबंधित राजस्व कर्मचारियों से रिपोर्ट तलब की गई है। नए आदेश के बाद अंचल स्तर पर भूमि मामलों में सतर्कता और जवाबदेही और सख्त हो गई है।