विदेश डेस्क, ऋषि राज |
प्योंगयांग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के साथ अपने देश की पारंपरिक मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को आगे भी मजबूती से जारी रखने का भरोसा दिया है। उत्तर कोरिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय हालात के बावजूद दोनों देशों के संबंध स्थिर, भरोसेमंद और दीर्घकालिक बने रहेंगे। इस बयान को पूर्वी एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में सुरक्षा, व्यापार और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
शी जिनपिंग ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ मुलाकात के दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन और उत्तर कोरिया केवल पड़ोसी देश नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से सहयोग और विश्वास के साझेदार भी रहे हैं। चीन क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तर कोरिया के साथ मिलकर काम करता रहेगा।
बैठक में आर्थिक सहयोग, सीमा व्यापार, आधारभूत ढांचे के विकास और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में आपसी समन्वय और संवाद पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बनी हुई हैं। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ बढ़ते रणनीतिक समीकरणों के बीच चीन और उत्तर कोरिया अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जिनपिंग का यह संदेश केवल प्योंगयांग के लिए नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक संकेत है कि चीन उत्तर कोरिया को लेकर अपनी नीति में किसी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।







