लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: जीवन में संस्कार और संक्रमण दोनों ही एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं।संस्कार जगत में मानव सभ्यता का कल्याण करते हैं, जबकि संक्रमण बीमारी फैलाकर मानव सभ्यता का सिर्फ विनाश ही करते हैं।उक्त विचार लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट ( 322 ई ) के जोनल चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।अनुभव कहता है कि सांसारिक रूप से धनवान होने के लिए भी मानसिक रूप से धनवान होना जरूरी है और यदि छोटी मानसिकता (छल,कपट, झूठ,ठगी आदि) द्वारा हमने धन अर्जित कर भी लिया तो ऐसा धन सुखदायी नहीं होता। परमात्मा सब जानते हैं,इन्सान की नीयत को भी और उसके दिखावे को भी।ख्वाहिशें और जरूरतें पूरा करने की कोशिश,ज़िम्मेदारियों को निभाने में और डिजिटल डिवाइस,रील,दिखावों में गुजर गया। शेष"चालाकियों" से किसी को कुछ देर तक "मोहित" किया जा सकता है पर जहाँ "दिल" जीतने की बात आती है तो "सरल" और "सहज" होना जरुरी है।हमेशा खुश रहना चाहिए क्योंकि परेशान होने से कल की मुश्किल तो दूर नहीं होगी,अलबत्ता आज का सुकून भी चला जाएगा। जब मनुष्य जन्म लेता है तो उसके पास सांसे तो होती है पर कोई नाम नहीं होता और जब मनुष्य की मृत्यु होती है तो उसके पास नाम तो होता है पर सांसे नहीं होती,इसी सांसों और नाम के बीच की यात्रा को "जीवन" कहते हैं। न किसी के अभाव में जियें,न किसी के प्रभाव में जियें,यह जिंदगी है आपकी,अपने स्वभाव में जियें।हिम्मत का एक कदम बढ़ाएँ तो परमात्मा की संपूर्ण मदद आपके साथ है। मन का शांत रहना "भाग्य", मन का वश में रहना "सौभाग्य", मन से किसी को याद करना "अहोभाग्य" और मन से कोई याद करे वो है "परम सौभाग्य"। तस्वीर में साथ रहने से एक पल यादगार बनता है जबकि "तकलीफ" में साथ रहने से पूरा जीवन यादगार बन जाता है।







