लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: जिसने हालात से समझौता किया, वह हार गया।
जो हालात से लड़ सका, मन की हालत को ऊंचा बनाकर, जो ज़िंदगी के समर में लड़ सका - वही विजेता है। यह विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह समाजसेवी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। है। क्या नहीं कराओ है, सबसे अच्छा मन? इसकी ताकत को पहचानना और उससे दोतरफ़ा निर्माण पेश करना ज़रूरी है। जब हम हालात पर बहुत ज़्यादा ज़ोर देते हैं, खुद को कमज़ोर और लाचार बताते हैं, अपनी काबिलियत से परिचित नहीं होते, तो इस तरह की उलझन पैदा होती है कि हमारी अंतरात्मा हमारा साथ देना बंद कर देती है।
हां, जब उसने खुद को किसी ऊंचे मोटिवेशन के हवाले करना सीख लिया हो। मन की ताकत को समझना ही असली आध्यात्मिकता है और इसके लिए हमें अपनी आसक्ति से छुटकारा पाना होगा। ज़िंदगी के ज़रूरी काम करने के लिए मन का आज़ाद होना ज़रूरी है। जीवन एक संपूर्ण पुस्तक है जिसके हर पन्ने को पलटना और पढ़ कर समझना जरूरी है।इंसानी जीवन जीना किसी रहस्य से कम नहीं है।तमाम उतार चढ़ाव आते है जीवन में,उससे लड़ते हुए जीवन गुजारना ही जीने की सच्ची आध्यात्मिक साधना है।







