Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

जो देश अपने हथियार खुद बनाता है, वह अपनी किस्मत खुद लिखता है: राजनाथ सिंह

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को केवल युद्ध की तैयारियों तक सीमित न मानकर, इसे देश की शांति, सतत विकास और आर्थिक मजबूती के लिए बेहद अनिवार्य बताया है।

शनिवार को महाराष्ट्र के शिर्डी में निजी क्षेत्र की कंपनी एनआईबीई (NIBE) ग्रुप के अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, "जो देश अपने हथियार खुद बनाता है, वह अपनी किस्मत खुद लिखता है। भावी युद्धों का परिणाम सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि उन्नत युद्ध सामग्री और स्वदेशी ऑटोमेशन (स्वचालन) से तय होगा।" इस अवसर पर उनके साथ महाराष्ट्र के नेता देवेंद्र फडणवीस और रक्षा क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
 इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने भारत के पहले 300 किलोमीटर रेंज वाले यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम 'सूर्यस्त्र' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्वदेशी तकनीक से निर्मित इस रॉकेट प्रणाली की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारतीय सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी और दुश्मनों के नापाक इरादों को पस्त करने के लिए 'सूर्यास्त' की तरह काम करेगी। कार्यक्रम में सूर्यस्त्र प्रणाली से जुड़े एक नए मिसाइल परिसर का शिलान्यास भी किया गया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय था जब रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान नगण्य था, जो आज बढ़कर लगभग 25 से 30 प्रतिशत हो चुका है। सरकार का आगामी लक्ष्य इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने का है। उन्होंने नए भारत की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा, "आज देश का निजी उद्योग केवल नट-बोल्ट की आपूर्ति करने वाला वेंडर नहीं रहा, बल्कि वह अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का मुख्य आविष्कारक और निर्माता बनकर उभर रहा है।" इस नए परिसर में उन्नत तोप प्रणाली, मिसाइल और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रॉकेट प्रणाली, एनर्जेटिक मटेरियल और स्वायत्त डिफेंस प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे।

सैन्य शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्यक्रम के दौरान स्वदेशी टीएनटी (TNT) प्लांट टेक्नोलॉजी और आरडीएक्स (RDX) प्लांट टेक्नोलॉजी का भी अनावरण किया गया। इसके साथ ही, पर्यावरण अनुकूल पहलों को बढ़ावा देते हुए 15 टन क्षमता वाले एक रिन्यूएबल बायो-एनर्जी कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट की शुरुआत की गई। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की पहुंच को मजबूत करने के लिए एनआईबीई ग्रुप और वैश्विक कंपनी ब्लैक स्काई (BlackSky) के बीच सैटेलाइट असेंबली को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी हुआ।

 रक्षा मंत्री ने विश्वास दिलाया कि शिर्डी का यह रक्षा हब न केवल हमारी सैन्य जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि शोध-उन्मुख केंद्र (Research Hub) के रूप में भी विकसित होगा। इस परिसर के चालू होने से स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भारी मात्रा में काम मिलेगा, जिससे सहायक उद्योगों का एक बड़ा इकोसिस्टम तैयार होगा। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उन्हें अत्याधुनिक तकनीकी कौशल सीखने का मौका मिलेगा, जो राष्ट्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।