नेशनल डेस्क, प्रीति पायल।
नई दिल्ली: भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत ऐतिहासिक वंशावलियों, प्राचीन पांडुलिपियों और पारिवारिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। इस पहल का उद्देश्य देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना और उसे डिजिटल माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
मिशन के अंतर्गत देशभर में 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने दस्तावेज़ों, ताड़पत्रों, हस्तलिखित ग्रंथों और पारिवारिक वंशावली रिकॉर्ड का सर्वेक्षण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम इन दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का कार्य कर रही है ताकि समय के साथ इनके खराब होने या नष्ट होने का खतरा कम हो सके।
सरकार ने इस अभियान के लिए विभिन्न राज्यों में नोडल एजेंसियों की नियुक्ति की है। ये एजेंसियां स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क कर ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान और डिजिटलीकरण का कार्य कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार मिशन के तहत लाखों दुर्लभ पांडुलिपियों और वंशावली रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में संग्रहित करने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटलीकरण के बाद इन अभिलेखों को राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित रखा जाएगा। इसके साथ ही डेटा सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों और क्लाउड बैकअप का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि वर्षों तक इन रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल इतिहास, संस्कृति और समाज से जुड़े शोध कार्यों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के बाद शोधकर्ता और विद्यार्थी देश के विभिन्न हिस्सों की ऐतिहासिक वंशावली और परंपराओं का अध्ययन आसानी से कर सकेंगे।
मिशन के तहत आम लोगों से भी अपील की गई है कि यदि उनके पास कोई पुरानी वंशावली, पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज़ मौजूद हैं तो वे प्रशासन को इसकी जानकारी दें। प्रशासन केवल उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगा, जबकि मूल दस्तावेज़ संबंधित परिवारों के पास ही सुरक्षित रहेंगे।







