स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
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पेंशन और सुरक्षा कानून लागू करने की उठी पुरजोर मांग।
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JJA की पहल पर घायल फोटो जर्नलिस्ट संजीब दत्ता को मुख्यमंत्री राहत कोष से मिली 1 लाख की सहायता
झारखंड: पत्रकार हितों की रक्षा और उनके हक की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ (BSPS) एवं झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (JJA) के संस्थापक शाहनवाज हसन ने आज झारखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर राज्य के हजारों पत्रकारों की लंबित मांगों को प्रमुखता से उनके समक्ष रखा।
इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि पत्रकारों की पेंशन योजना, स्वास्थ्य बीमा और सबसे महत्वपूर्ण
'पत्रकार सुरक्षा कानून' से जुड़ी सभी मांगें जल्द ही पूरी की जाएंगी। पत्रकार सुरक्षा कानून पर जोर
शाहनवाज हसन ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि पत्रकार जोखिम में काम कर रहे हैं, ऐसे में सुरक्षा कानून अनिवार्य है।
दो साल का इंतजार होगा खत्म
विधानसभा के समक्ष पूर्व में हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान मिले आश्वासन को लागू करने की मांग दोहराई गई।
स्वास्थ्य बीमा की अनदेखी पर सवाल: सरकार द्वारा राशि लेने के बावजूद स्वास्थ्य बीमा कार्ड जारी न होने पर संगठन ने नाराजगी जताई।
आर्थिक मदद की पहल
JJA की सक्रियता से सड़क दुर्घटना में घायल फोटो जर्नलिस्ट को मिली सरकारी सहायता।
- संजीब दत्ता का मामला: व्यवस्था की विफलता और संगठन का सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक, जमशेदपुर के फोटो जर्नलिस्ट संजीब दत्ता पिछले दिनों एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। रांची के मणिपाल अस्पताल में उनके इलाज पर लगभग 25 लाख रुपये खर्च हुए। विडंबना यह रही कि झारखंड सरकार ने पत्रकारों से प्रीमियम की राशि तो ली, लेकिन स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं दिया। इस कारण संजीब दत्ता को कर्ज लेकर अपना इलाज कराना पड़ा।
इस संकट की घड़ी में झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने पहल की और मुख्यमंत्री राहत कोष से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कराई। साथ ही संगठन के सदस्यों ने आपसी सहयोग से भी उनकी मदद की है।
विधानसभा में गूंजी पत्रकारों की आवाज
आज मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में शाहनवाज हसन के साथ रांची जिला अध्यक्ष पंकज सिंह, जिला सचिव हेमंत मांझी, आकाश कुमार सोनी, और वीर सिंह सहित कई अन्य पत्रकार मौजूद थे। संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक पेंशन और बीमा जैसी बुनियादी मांगें जमीन पर नहीं उतरतीं, पत्रकारों का संघर्ष जारी रहेगा।
नोट: यह खबर झारखंड के पत्रकार जगत में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि संगठन ने न केवल नीतिगत मांगें रखीं, बल्कि एक साथी पत्रकार को सीधे आर्थिक मदद दिलाकर अपनी एकजुटता का परिचय भी दिया है।







