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डिग्री कॉलेजों में पार्ट टाइम प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए एक विवि बनेगा नोडल

स्टेट डेस्क, मुस्कान कुमारी।

पटना। राज्य के 211 डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की पारदर्शी और तेज नियुक्ति के लिए एक विश्वविद्यालय को नोडल बनाए जाने की तैयारी चल रही है। राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग जल्द ही इस संबंध में गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। नया शैक्षणिक सत्र एक जुलाई से शुरू होने वाला है।

राज्य सरकार डिग्री कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होने तक अंशकालिक (पार्ट टाइम) प्रोफेसरों की नियुक्ति का फैसला पहले ही ले चुकी है। सूत्रों के अनुसार, पूरे राज्य में इस प्रक्रिया को एक जगह केंद्रित करने के लिए एक विश्वविद्यालय को नोडल एजेंसी का जिम्मा सौंपा जाएगा।

नोडल विवि की जिम्मेदारी

यह नोडल विश्वविद्यालय कॉलेजवार और विषयवार योग्य शिक्षकों की सूची तैयार करेगा। साथ ही उनकी नियुक्ति प्रक्रिया को सुनिश्चित करेगा। अभी तक अलग-अलग स्तर पर हो रही नियुक्तियों की बजाय एक केंद्रित व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

सत्र शुरू होने से पहले पूरी होगी प्रक्रिया

एक जुलाई से नया सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में नोडल विवि को जून के अंत तक नियुक्तियां पूरी करनी होंगी। राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

हर कॉलेज में कितने पद

प्रत्येक डिग्री कॉलेज में 32 शिक्षकों और 12 गैर-शिक्षण कर्मचारियों का प्रावधान रखा गया है। प्रति विषय दो-दो शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। फिलहाल पटना और नालंदा जिलों के 16 डिग्री कॉलेजों में हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र विषयों की पढ़ाई होगी।

स्थायी प्रोफेसरों के आने तक संभालेंगे कक्षाएं

ये पार्ट टाइम प्रोफेसर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होने तक कक्षाओं को संभालेंगे। इससे छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्यों जरूरी है नोडल व्यवस्था

अभी डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में सत्र शुरू होने से पहले व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। नोडल विवि पूरे राज्य के लिए एक ही जगह से नियुक्ति प्रक्रिया संचालित करेगा, जिससे देरी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

211 कॉलेजों पर असर

बिहार के सभी 211 डिग्री कॉलेज इस व्यवस्था से जुड़ेंगे। इससे पहले अलग-अलग कॉलेजों में स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां होती थीं, लेकिन अब एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक, योग्यता के आधार पर शिक्षकों का चयन किया जाएगा। छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।