‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 67 लाख की ठगी, पिता-पुत्र गिरफ्तार; 200 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
स्टेट डेस्क , रानी कुमारी
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर 12 दिनों के भीतर 67 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के सरगना और उसके बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह है कि मुख्य आरोपी बिहार सरकार का सेवानिवृत्त सांख्यिकी अधिकारी बताया जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 60 वर्षीय प्रियरंजन शर्मा और उनके पुत्र अनंत अमीष के रूप में हुई है। दोनों को राजीव नगर स्थित उनके आवास से छापेमारी कर पकड़ा गया। पुलिस ने मौके से 23,900 रुपये नकद, एक लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, 19 बैंक पासबुक, चेकबुक, चार मुहर और एक पेन ड्राइव समेत कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को पुलिस, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन (सीबीआई) और टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते थे। ताजा मामले में पीड़ित को लगातार 12 दिनों तक कॉल कर यह झूठ बताया गया कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल पहलगाम हमले में हुआ है। डर के कारण पीड़ित ने अलग-अलग खातों में कुल 67 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस की जांच में आरोपियों के पास फ़ॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) से जुड़े चार बैंक खातों की जानकारी मिली है। इन खातों में विदेश से करीब 200 करोड़ रुपये तक के संदिग्ध लेन-देन के संकेत मिले हैं। गिरोह फर्जी कंपनियों और एनजीओ के नाम पर खाते खोलकर ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर करता था, ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
मुजफ्फरपुर साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के अनुसार, यह गिरोह पिछले एक साल से सक्रिय था और देश के कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला चुका था। आरोपियों के खिलाफ 28 राज्यों के विभिन्न थानों में शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा Mumbai Crime Branch और पवई थाना में भी इनके खिलाफ मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की जांच में जुटी है, ताकि इस साइबर ठगी के पूरे तंत्र का खुलासा किया जा सके ।







