ढाका में नई शुरुआत: तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे ओम बिरला
नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय
नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। 17 फरवरी 2026 को ढाका में आयोजित होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर के लिए भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे, और उनकी जगह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहले से तय व्यस्तताओं के कारण वे ढाका की यात्रा नहीं कर सकेंगे। जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी को पीएम मोदी मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यस्त रहेंगे और उसके बाद दिल्ली में आयोजित 'AI इम्पैक्ट समिट' की अध्यक्षता करेंगे। हालांकि, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से तारिक रहमान को उनकी शानदार जीत पर बधाई दी है और दोनों देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई है।
भारत ने इस महत्वपूर्ण राजनयिक कार्यक्रम के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी ढाका जाएंगे। राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में लोकसभा अध्यक्ष को भेजना यह दर्शाता है कि भारत बांग्लादेश के लोकतांत्रिक बदलाव का सम्मान करता है और पड़ोसी देश की नई सरकार के साथ स्वस्थ संबंधों की नींव रखना चाहता है।
तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं, करीब 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद सत्ता के शीर्ष पर लौटे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार (डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) कार्य कर रही थी। अब एक निर्वाचित सरकार का सत्ता में आना क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत, यह दौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि तारिक रहमान ने अपने चुनावी भाषणों में 'बांग्लादेश फर्स्ट' की नीति पर जोर दिया है, लेकिन साथ ही भारत जैसे पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंधों की इच्छा भी जताई है। ओम बिरला की उपस्थिति न केवल एक प्रोटोकॉल है, बल्कि यह संदेश भी है कि भारत अपने निकटतम पड़ोसी की प्रगति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनके साथ खड़ा है।
शपथ ग्रहण समारोह के लिए भारत के अलावा चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान और मलेशिया सहित 13 अन्य देशों को भी आमंत्रित किया गया है। दक्षिण एशिया के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत का यह कदम बेहद संभलकर उठाया गया है। भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि नई सरकार के साथ व्यापार, सुरक्षा और साझा जल संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत का सिलसिला बिना किसी बाधा के जारी रहे।







