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नए साल की बधाई में छिपा खतरा: एक क्लिक बना सकता है ठगी का शिकार

स्टेट डेस्क, मुस्कान कुमारी।

पटना: नया साल आने से पहले ही मोबाइल पर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ और ‘स्पेशल विश’ जैसे संदेशों की बाढ़ आ गई है। लेकिन इन शुभकामनाओं के पीछे अब छुपा है एक नया खतरा — साइबर ठगी का। पटना पुलिस ने लोगों को चेतावनी जारी कर कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही किसी को भी साइबर अपराधियों का शिकार बना सकती है।

साइबर पुलिस की चेतावनी

पटना के साइबर डीएसपी नीतीश चंद दरिया ने बताया कि ठग भावनाओं का फायदा उठाते हैं। नए साल की खुशी में लोग बिना सोचे-समझे शुभकामना संदेशों के साथ आए लिंक या फाइल पर क्लिक कर देते हैं। यही एक क्लिक मोबाइल हैकिंग का जरिया बन जाता है।  

उन्होंने कहा, “लोग समझते हैं कि यह केवल एक न्यू ईयर कार्ड या वीडियो ग्रीटिंग है, लेकिन असल में वह एक खतरनाक फाइल होती है जो मोबाइल के अंदर तक पहुंच बना लेती है।”

कैसे होता है साइबर अटैक

साइबर अपराधी आम तौर पर व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘स्पेशल न्यू ईयर गिफ्ट’, ‘सरप्राइज कार्ड’, ‘डिस्काउंट कूपन’, या ‘एक्सक्लूसिव विशेस’ के नाम से लिंक भेजते हैं।  

  • लिंक खोलते ही मोबाइल सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से एक हानिकारक APK फाइल डाउनलोड कर लेता है।
  • यह फाइल आपके मोबाइल के बैंकिंग ऐप, UPI और OTP तक पहुंच बना लेती है।
  • कुछ मामलों में मोबाइल का पूरा नियंत्रण ठगों के हाथ में चला जाता है।  

डीएसपी दरिया ने कहा कि अपराधी इतने चालाक हैं कि लिंक को बेहद विश्वसनीय दिखाने की कोशिश करते हैं: जैसे किसी नामी बैंक, शॉपिंग साइट या मोबाइल नेटवर्क प्रोवाइडर के नाम से।

त्योहारों के सीजन में बढ़ती ठगी

साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर बार त्योहारों और खास अवसरों पर ठगी के मामलों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जाती है। त्योहारों के समय लोग जल्दी में संदेश खोलते हैं और सुरक्षा जांच की अनदेखी करते हैं।  
नए साल के मौके जैसे अहम समय में, जब हर कोई शुभकामनाएं शेयर करता है, अपराधियों को इसका खास मौका मिल जाता है।

वॉट्सऐप और सोशल मीडिया सबसे बड़ा जरिया

साइबर पुलिस के मुताबिक, अधिकांश ठगी के लिंक व्हाट्सएप ग्रुप्स, इंस्टाग्राम डीएम और मैसेंजर इनबॉक्स में फैलाए जाते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही एक दिखावटी वेबपेज खुलता है, जो यूजर से ‘एक्सेस परमिशन’ मांगता है — लेकिन असल में वहीं से हैकिंग की प्रक्रिया शुरू होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फाइल अक्सर फोन में स्पायवेयर इंस्टॉल कर देते हैं, जो आपके SMS, पासवर्ड और बैंक ऐप्स से डाटा चुरा लेते हैं।

डीएसपी दरिया की अपील

नीतीश चंद दरिया ने कहा कि “सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।” उन्होंने लोगों से अपील की:

1. अनजान लिंक या APK फाइल को तुरंत डिलीट करें।  

2. किसी भी फाइल को डाउनलोड करने से पहले उसकी जरूरत पर विचार करें।

3. मोबाइल में एंटी-वायरस और सिक्योरिटी अपडेट सक्रिय रखें।  

4. बुजुर्गों और बच्चों को ऐसे साइबर खतरों से अवगत कराएं।  

उन्होंने यह भी सलाह दी कि बैंक या किसी कंपनी के नाम पर आ रहे ईमेल या मैसेज की पहले  ऑफिशियल वेबसाइट से पुष्टि जरूर करें।

कैसे पहचानें फर्जी बधाई लिंक

  • डोमेन नेम में गलत स्पेलिंग या अजीब सी वेबसाइट (जैसे happynyear.giftz.co.in) दिखाई दे।
  • OTP, पासवर्ड या अकाउंट डिटेल मांगने की कोशिश की जाए।
  • किसी लिंक में बहुत अधिक इमोजी, चमकदार फॉन्ट या “हैप्पी न्यू ईयर का तोहफा पाएं” जैसे लालच भरे वाक्य हों।  
  • ऐसे में तुरंत लिंक डिलीट करें और अगर पहले से खुल चुका हो तो फोन स्कैन कराएं या साइबर सेल को सूचित करें।

जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

पटना पुलिस ने सभी नागरिकों से अपील की है कि नए साल की खुशी में सुरक्षा को न भूलें। अगली बार जब कोई “स्पेशल न्यू ईयर विश” भेजे, तो उस पर क्लिक करने से पहले दो बार सोचें। पटना साइबर सेल ने अपने हेल्पलाइन नंबर और सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी अलर्ट जारी किया है ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि तुरंत रिपोर्ट की जा सके।