Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

नीतीश के करीबी अशोक चौधरी की जांच करवाएंगे शिक्षा मंत्री

स्टेट डेस्क, नीतीश कुमार।

पटना। नीतीश कुमार के करीबी और मंत्री अशोक चौधरी के प्रोफेसर बनने के मामले की जांच कराई जाएगी। शिक्षा मंत्री सुनील सिंह ने सोमवार को इस संबंध में जानकारी दी। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि अशोक चौधरी से जुड़ा मामला यूनिवर्सिटी सेवा आयोग को जांच के लिए भेजा गया है, क्योंकि फाइल में कुछ कमियां पाई गई हैं। आयोग से जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अशोक चौधरी की नियुक्ति फाइल में खामियां होने के कारण उनकी प्रोफेसर पद पर जॉइनिंग फिलहाल रुकी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि फाइल में किस तरह की कमी पाई गई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि नियुक्ति में अड़चन की ठोस वजह क्या है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नाम से जुड़ा विवाद इसकी एक वजह हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, अशोक चौधरी के शैक्षणिक दस्तावेजों में उनका नाम अशोक कुमार दर्ज है, जबकि चुनावी हलफनामे में उनका नाम अशोक चौधरी है। सूत्रों का कहना है कि नामों में इस अंतर के कारण नियुक्ति प्रक्रिया अटक सकती है।

जून में जारी हुआ था परिणाम

अशोक चौधरी उन 274 उम्मीदवारों में शामिल थे, जिन्होंने पॉलिटिकल साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए इंटरव्यू पास किया था। इस पद के लिए वर्ष 2020 में विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन अंतिम परिणाम 2025 में जारी किए गए।

परिणाम घोषित होने के छह महीने बाद भी कई उम्मीदवारों को कॉलेज आवंटित नहीं किया गया था। सूत्रों के अनुसार, अशोक चौधरी के मामले की जांच के चलते ही इस पूरी प्रक्रिया में देरी हुई।

तेजस्वी यादव ने भी उठाए थे सवाल

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अशोक चौधरी के चयन पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने पूछा था कि मंत्री जी ने आखिर परीक्षा कब दी और उन्हें परीक्षा देते हुए किसने देखा।

वहीं कांग्रेस ने भी उनकी पीएचडी डिग्री को लेकर सवाल उठाए थे और पूछा था कि नियुक्ति अब तक क्यों नहीं हो सकी।

असिस्टेंट प्रोफेसर बनने पर अशोक चौधरी का बयान

हाल ही में दैनिक भास्कर से किए बातचीत में अशोक चौधरी ने कहा था, “कोई पूछे, तब न हम बताएं कि प्रोफेसर कैसे बना जाता है। 1991 में मास्टर्स किया, 2005 में पीएचडी की। वैकेंसी निकली तो आवेदन कर दिया। अब देखते हैं कि मौका मिलता है या नहीं।”

यह बयान उन्होंने उस सवाल के जवाब में दिया था, जिसमें उनसे पूछा गया था कि तेजस्वी यादव आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर दलितों की एक सीट ले ली।

जब उनसे यह पूछा गया कि जिस वाइस चांसलर को उन्होंने शिक्षा मंत्री रहते नियुक्ति पत्र दिया था, क्या वे उन्हीं के अधीन काम करना पसंद करेंगे, तो उन्होंने कहा था कि इसमें कोई दिक्कत नहीं है। उनके अनुसार, वाइस चांसलर की नियुक्ति उनका प्रशासनिक दायित्व था और अब वे अपने विषय में छात्रों को पढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि सेवानिवृत्ति के बाद यह संतोष रहेगा कि उन्होंने कुछ हासिल किया।