स्टेट डेस्क, मुस्कान कुमारी।
पटना। बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने राज्यसभा चुनाव-2026 के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। दशकों से राज्य की कमान संभाल रहे नीतीश अब सक्रिय सत्ता से विदा लेने को तैयार नजर आ रहे हैं, जिससे विधानसभा की कुर्सी पर नए चेहरे की दौड़ तेज हो गई है।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नीतीश को दिल खोलकर बधाई दी। उनके संदेश ने न सिर्फ एनडीए के भीतर तालमेल का संकेत दिया, बल्कि बिहार की राजनीति के नए समीकरणों की झलक भी दिखाई। चौधरी ने लिखा, "मुख्यमंत्री श्री कुमार को राज्यसभा चुनाव-2026 के लिए जदयू से उम्मीदवार घोषित किए जाने पर अनंत बधाई एवं शुभकामनाएं।" उन्होंने नीतीश के 'दूरदर्शी नेतृत्व', 'सुशासन की अटूट प्रतिबद्धता' और 'बिहार के समग्र विकास' के प्रयासों को प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि राज्यसभा की गरिमा उनके अनुभव से और मजबूत होगी।
यह घोषणा जदयू की कोर कमेटी की बैठक के ठीक बाद आई, जहां नीतीश की राष्ट्रीय भूमिका पर लंबी चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला केंद्र की एनडीए सरकार के साथ गठबंधन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए लिया गया। नीतीश, जो 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं, अब संसद के ऊपरी सदन में अपनी प्रशासनिक विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि उनके जाने से राज्य की सत्ता का संतुलन कैसे बनेगा?
एनडीए में गठजोड़ की नई तस्वीर
सम्राट चौधरी का बधाई संदेश महज औपचारिकता नहीं, बल्कि भाजपा-जदयू के बीच बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। एक ओर जहां विपक्ष इसे नीतीश की 'राज्य स्तर की विदाई' बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे 'अनुभव का राष्ट्रीय विस्तार' करार दे रहा। चौधरी के शब्दों में नीतीश को 'प्रेरणास्रोत' कहना एनडीए के आंतरिक समन्वय को रेखांकित करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन को और मजबूत बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
पटना के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। जदयू मुख्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा, जो नीतीश के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ समर्थक इसे उनकी 'बड़ी छलांग' बता रहे हैं, तो कुछ चिंता जता रहे हैं कि राज्य स्तर पर पार्टी का चेहरा कमजोर न पड़ जाए। एक वरिष्ठ जदयू नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "नीतीश जी का अनुभव अब दिल्ली की जरूरत है, लेकिन बिहार का विकास रुकेगा नहीं।"
अगला सीएम: कौन लेगा कमान?
नीतीश के राज्यसभा जाने से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर नजरें टिक गई हैं। कयासबाजी जोरों पर है – क्या भाजपा का कोई मजबूत नेता, जैसे सम्राट चौधरी खुद, इस कुर्सी पर विराजमान होंगे? या जदयू कोई नया चेहरा लाएगा, जैसे आरसीपी सिंह या किसी युवा विधायक? एनडीए सूत्र बताते हैं कि यह फैसला जल्द ही लिया जाएगा, ताकि गठबंधन का संतुलन बना रहे। विपक्षी दलों, खासकर आरजेडी, ने इसे 'एनडीए का आंतरिक संकट' करार दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, "नीतीश जी की विदाई से बिहार की जनता को राहत मिलेगी, लेकिन सत्ता का खेल अब और गहरा जाएगा।"
इस बीच, केंद्र में भाजपा नेतृत्व की नजरें नीतीश पर हैं। माना जा रहा है कि राज्यसभा पहुंचते ही उन्हें कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय या समिति की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। नीतीश का लंबा प्रशासनिक रिकॉर्ड – सुशासन मॉडल से लेकर विकास योजनाओं तक – दिल्ली के लिए अमूल्य साबित हो सकता है। लेकिन राज्य स्तर पर यह बदलाव बिहार की सियासत को नई दिशा देगा, जहां जातिगत समीकरणों और गठबंधन की जद्दोजहद अब और तीखी हो जाएगी।
जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि पार्टी का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है। उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार बिहार के साथ-साथ देश की सेवा के लिए तैयार हैं। राज्यसभा उनका नया मंच बनेगा।" वहीं, भाजपा के एक अन्य नेता ने पृष्ठभूमि में कहा कि गठबंधन में कोई दरार नहीं, बल्कि यह मजबूती का प्रतीक है।
पटना की सड़कों पर आज राजनीतिक बहस छिड़ गई। चाय की दुकानों से लेकर विधानसभा भवन तक, हर तरफ यही चर्चा है – बिहार का अगला चेहरा कौन? नीतीश का यह कदम न सिर्फ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का प्रतीक है, बल्कि पूरे एनडीए के रणनीतिक सोच को भी उजागर करता है। राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही यह ड्रामा और तेज होगा।







