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नीरा से बदली किस्मत, रचा रोजगार का नया मॉडल

लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना ।

नीरा से बदली किस्मत, तिलकुट और मिठाइयों ने बोधगया में रचा रोजगार का नया मॉडल

नीरा से स्वाद और स्वरोजगार, बोधगया में देसी-विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बना तिलकुट

पटना/ बोधगया। गयाजी में बनने वाली प्रसिद्ध तिलकुट और लाई तो सबने खाई होगी, मगर क्या आपने नीरा से बनी गुड़ की  तिलकुट, अनरसा, लाई, चाय और लड्डू का स्वाद चखा है, अगर नहीं तो अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया स्थित महाबोधी मंदिर पधारिए। जहां आकाश जीविका द्वारा संचालित स्टॉल चल रहा है, जो आजकल जो देसी  और विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है क्योंकि यहां नीरा और नीरा से बने व्यंजनों की बिक्री होती है। 

नीरा से बने तिलकुट, अनरसा और चाय ने खोले रोजगार के नए रास्ते
इस स्टॉल के संचालक बोधगया के इलरा गांव निवासी डब्ल्यू कुमार हैं, जो पहले दूसरे राज्यों में मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का घर चला रहे थे। लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्ण शराबबंदी की घोषणा के साथ ही नीरा की बिक्री को बढ़ावा देने के फैसले ने डब्ल्यू कुमार की ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी। उन्होंने नीरा और नीरा से बने उत्पादों को बनाने और बेचने की सोची। जिसके बाद दूसरे प्रदेशों में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले डब्ल्यू कुमार ने अब नीरा से गुड़ तैयार करने और उसी गुड़ से तिलकुट, लाई, अनरसा और लड्डू जैसी पारंपरिक मिठाइयां बनाने में खास पहचान बना ली है। उनकी मेहनत और हुनर आज उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी स्वाद और रोजगार का नया विकल्प पेश कर रहा है। और अब इनके द्वारा नीरा से बनाए गए चाय और मिठाई की स्वाद को एक बार चखने के बाद ग्राहक बार-बार इसका स्वाद लेना चाहते हैं।

 
कम मीठा, सेहतमंद तिलकुट बना डायबिटीज मरीजों की भी पसंद
उन्होंने अपने इस सफर के बारे में आगे बताते हुए कहा कि साल 2023 में पहली बार नीरा का गुड़ बनाकर तिलकुट बनाया था, जिसका स्वाद चखने और उसे बनाने की प्रक्रिया देखने के लिए खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इलरा गांव आये थे। डब्ल्यू कुमार बताते हैं कि नीरा का तिलकुट भी लगभग उसी विधि से तैयार किया जाता है, जैसे सामान्य तिलकुट बनाया जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें चीनी या पारंपरिक गुड़ की जगह नीरा से तैयार गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। उनका कहना है कि नीरा के गुड़ से बना तिलकुट अधिक मीठा नहीं होता, इसी वजह से डायबिटीज से पीड़ित लोग भी इसे बेझिझक पसंद कर रहे हैं।

डबल्यू कुमार बताते हैं कि उनके गांव में नीरा और उससे बनने वाले उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। शुरुआत में यह काम वे अकेले करते थे, लेकिन अब इस व्यवसाय के विस्तार से उनकी पत्नी सहित परिवार के सभी सदस्यों को घर पर ही रोजगार मिल गया है।

नीतीश सरकार ने की मदद
डब्ल्यू कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने नीरा और नीरा से बनी मिठाइयों की बिक्री के लिए बोधगया और गया में विशेष काउंटर उपलब्ध कराए हैं। उनके अनुसार तिलकुट के सीजन में नीरा के तिलकुट की प्रतिदिन 150 किलोग्राम से अधिक बिक्री हुई है।

गांवों की अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती
उन्होंने बताया कि इस वर्ष एक लाख लीटर से अधिक नीरा से गुड़ तैयार किया गया, और उसी गुड़ से पेड़ा, लाई के साथ-साथ नीरा की चाय भी बनाकर बेची जा रही है। कीमतों के बारे में उन्होंने बताया कि जहां सामान्य तिलकुट 360 से 380 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं नीरा का तिलकुट 400 से 410 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। पटना के गांधी मैदान में आयोजित सरस मेले में भी बिहार सरकार की ओर से उन्हें स्टॉल उपलब्ध कराया गया था, जहां प्रतिदिन 70 से 100 किलोग्राम तक तिलकुट की बिक्री दर्ज की गई थी।

तिलकुट सीजन में रोजाना 150 किलो से अधिक बिक्री
नीरा से तैयार तिलकुट बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों के बीच भी खासा लोकप्रिय हो रहा है। डब्ल्यू कुमार बताते हैं कि इसकी सबसे अधिक बिक्री ठंड के मौसम में होती है। इसके अलावा पितृपक्ष मेले की अवधि और बोधगया में आयोजित होने वाली विशेष पूजा–पाठ के अवसरों पर मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जाती है। उनका कहना है कि नीरा के तिलकुट का बाजार पूरे साल बना रहता है, लेकिन सर्दियों में इसकी डिमांड काफी बढ़ जाती है।

उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य में शराबबंदी लागू किए जाने के बाद से ही नीरा के उत्पादन को बढ़ावा मिला, जिससे आज नीरा और उससे बने उत्पाद लोगों की आजीविका का मजबूत आधार बनता जा रहा है।