नीली क्रांति को नई रफ़्तार: डिजिटल तकनीक और बीमा सुरक्षा से सशक्त हो रहा मत्स्य क्षेत्र
नेशनल डेस्क , रानी कुमारी
नई दिल्ली, भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल समाधानों और व्यापक बीमा कवरेज पर जोर देना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछुआरों को जोखिम से बचाने और उनके व्यवसाय को तकनीक से जोड़ने के लिए कई नई सुविधाएं पेश की गई हैं।
मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, समुद्र में जाने वाले मछुआरों के जीवन और उनकी नौकाओं (Boats) के लिए बीमा योजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अब मछुआरों को न केवल दुर्घटना बीमा मिल रहा है, बल्कि प्रतिकूल मौसम या प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक देश के सभी सक्रिय मछुआरों को इस सुरक्षा चक्र के दायरे में लाना है।
डिजिटल सुविधाओं से 'स्मार्ट' हुआ मछली पालन
ई-गोपाला और मत्स्य सेतु ऐप: इन मोबाइल ऐप्स के माध्यम से मछुआरों को मछली पालन की आधुनिक तकनीकों, जल गुणवत्ता प्रबंधन और बाजार की ताजा कीमतों की जानकारी मिल रही है।
सैटेलाइट मैपिंग: इसरो (ISRO) की मदद से मछुआरों को समुद्र में उन संभावित क्षेत्रों की सटीक लोकेशन दी जा रही है जहाँ मछलियों की तादाद अधिक है। इससे उनके ईंधन और समय की बचत हो रही है।
डिजिटल भुगतान और ई-कॉमर्स: अब सीधे तालाब से बाजार तक मछली बेचने के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस बनाए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि बीमा और डिजिटल सुविधाओं के मेल से इस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल इंडिया का यह विस्तार केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) की रीढ़ बन रहा है। बीमा की सुविधा मिलने से गरीब मछुआरों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है, जिससे वे अब नई तकनीकों को अपनाने में संकोच नहीं कर रहे हैं।







