नेपाल: जनप्रतिनिधियों के संपत्ति जांच की मांग, युवाओं का सुशासन से सवाल – राहुल गुप्ता
लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना।
रक्सौल / बीरगंज नेपाल में वर्ष 1990 के जनआंदोलन के बाद स्थापित लोकतांत्रिक व्यवस्था ने नागरिकों को राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्रदान की, लेकिन जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में पारदर्शिता का मुद्दा अब भी बहस के केंद्र में बना हुआ है।
इसी संदर्भ में नेपाल पत्रकार महासंघ पर्सा के कार्यसमिति सदस्य तथा वीरगंज के युवा राहुल गुप्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। उन्होंने वर्ष 1990 से लेकर अब तक के वार्ड सदस्य से लेकर प्रधानमंत्री तक सभी जनप्रतिनिधियों की संपत्ति की जांच की मांग की है।गुप्ता के अनुसार, पिछले तीन दशकों से अधिक समय में विभिन्न स्तर के नेताओं द्वारा पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने की आशंका जनता के बीच बढ़ती जा रही है। यदि निष्पक्ष और सख्ती के साथ संपत्ति की जांच की जाए, तो देश के भीतर छिपी काली संपत्ति सामने आ सकती है और उसे राष्ट्रीय विकास में उपयोग करने की संभावना भी मजबूत होगी।
नेपाल के कई सरकारी उद्योग, कारखाने और आधारभूत संरचनाएं जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं। ऐसे में उनके पुनर्निर्माण और संचालन के लिए बड़े आर्थिक स्रोत की आवश्यकता है। यदि भ्रष्टाचार से अर्जित अवैध संपत्ति को कानूनी दायरे में लाकर राज्य कोष में जमा किया जाए, तो नए परियोजनाओं के निर्माण, सेवा सुधार और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।
इसी बीच, विभिन्न सीमावर्ती नाकों के माध्यम से अवैध रूप से धन बाहर जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। ऐसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गृह मंत्रालय, नेपाल पुलिस तथा सशस्त्र पुलिस बल जैसे निकायों को सीमा सुरक्षा और वित्तीय अपराध नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।काले धन को नियंत्रित करने के लिए ५०० और १००० के नोटों को बंद करना एक अत्यंत आवश्यक कदम माना जा रहा है, क्योंकि नोटबंदी के बाद अवैध रूप से जमा धन अपने आप सामने आने की संभावना व्यक्त की गई है।
संपत्ति जांच का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास से सीधे जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। यदि राज्य इस प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाता है, तो भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है।
नेपाल पत्रकार महासंघ पर्सा के कार्यसमिति सदस्य राहुल गुप्ता जैसे युवाओं द्वारा उठाई गई इन आवाज़ों को यदि राज्य गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाता है, तो नेपाल में सुशासन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होने की उम्मीद की जा रही है।







