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“न्याय सिर्फ हो ही नहीं, दिखना भी जरूरी” – मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत

स्टेट डेस्क - वेरॉनिका राय

सरकारी सेवकों के मामलों में निष्पक्ष जांच और प्रशिक्षण से मजबूत होगा प्रशासनिक सिस्टम

पटना | बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि सरकारी सेवकों से जुड़े मामलों में न्याय सिर्फ किया जाना ही नहीं, बल्कि साफ तौर पर दिखना भी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच और प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी को अपने काम में पूरी क्षमता और ईमानदारी दिखानी चाहिए।

वे मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय के सभागार में विभागीय गतिविधियों से जुड़ी नई वेबसाइट के उद्घाटन कार्यक्रम में बोल रहे थे।

मुख्य सचिव ने हाल के दिनों में दिए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने बताया कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत प्रशासनिक पदाधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है, जो बहुत जरूरी कदम है। उन्होंने दीपक कुमार सिंह और उनकी टीम के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि फरवरी-मार्च से शुरू इस अभियान में अब तक 3500 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इससे सरकारी मामलों में निष्पक्षता और नैसर्गिक न्याय सुनिश्चित होगा।

उन्होंने अभिलेख (रिकॉर्ड) के बेहतर रख-रखाव के लिए भी जोर दिया और डॉ. बी. राजेन्दर तथा उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पहल भविष्य में प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी।

इस अवसर पर दीपक कुमार सिंह ने जानकारी दी कि अब तक 3507 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें 42 वरिष्ठ अधिकारी (अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव स्तर) और पटना में कार्यरत 95 आईएएस अधिकारियों को अनुशासनिक कार्रवाई के नियमों की ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही, प्रशिक्षित अधिकारियों की परीक्षा भी ली जा रही है ताकि उनकी समझ को परखा जा सके।

उन्होंने बताया कि जिलों में भी प्रशिक्षण को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षकों की एक टीम तैयार की जा रही है। इसके लिए एक नई वेबसाइट बनाई गई है, जहां अनुशासनिक कार्रवाई से जुड़ी सभी जरूरी किताबें और सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. बी. राजेन्दर ने स्वागत भाषण दिया। इस मौके पर मिहिर कुमार सिंह, अरविंद कुमार चौधरी, संतोष कुमार मल्ल, प्रणव कुमार और रचना पाटिल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहल न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाएगी, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के मामलों में निष्पक्ष और स्पष्ट न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।