लोकल डेस्क, एन के सिंह।
बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए विद्युत विभाग के साथ समन्वय और कृषि आधारित उद्योगों के लिए मार्केट लिंकेज व भंडारण की व्यवस्था की जाएगी।
पूर्वी चंपारण: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'सात निश्चय-3' के तहत औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में "उद्यमी संवाद कार्यक्रम" का आयोजन किया। इस विशेष पहल के माध्यम से जिले के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत करने और स्थानीय उद्यमियों की बाधाओं को दूर करने के लिए सीधा संवाद स्थापित किया गया। बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए छोटे-बड़े उद्यमियों ने हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं के साथ-साथ जिले के विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
संवाद के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप अब पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन नियमित रूप से इस तरह के विमर्श आयोजित करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य उद्यमियों और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि उद्यमी बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी अपेक्षाएं सीधे सरकार तक पहुँचा सकें। जिलाधिकारी के अनुसार, यह संवाद न केवल मौजूदा उद्योगों की समस्याओं को सुलझाएगा, बल्कि नए निवेशकों के लिए संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा, जिससे पूर्वी चंपारण को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में पहचान दिलाई जा सके।
कार्यक्रम में उद्यमियों ने मुख्य रूप से लाइसेंसिंग प्रक्रिया में होने वाली देरी, भूमि आवंटन की जटिलताओं, बिजली कनेक्शन की समस्याओं और कर संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा विभिन्न विभागीय समन्वय की कमी पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अग्निशमन, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और माप-तौल जैसे विभागों से मिलने वाले अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तथा भूमि परिवर्तन (Mutation/CLU) से जुड़े मामलों की अब नियमित निगरानी की जाएगी ताकि समय सीमा के भीतर अनुमतियां मिल सकें।
जिले में निर्बाध बिजली आपूर्ति को उद्योगों की रीढ़ बताते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें की जाएंगी ताकि तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जा सके। इसके साथ ही, कृषि प्रधान जिला होने के नाते कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर भी विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि किसानों को बेहतर मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराने और भंडारण की समस्याओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ-साथ किसानों को भी उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके। अंत में उन्होंने सभी उद्यमियों का आह्वान किया कि वे एक सहज औद्योगिक वातावरण बनाने में प्रशासन का सहयोग करें।







