पूर्वी चंपारण: विराट रामायण मंदिर में विश्व प्रसिद्ध 'सहस्त्रलिंगम' की प्राण-प्रतिष्ठा
स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अष्ट नदियों के पवित्र जल और 108 कलशों से किया महादेव का महाभिषेक, बने ऐतिहासिक क्षण के साक्षी।
पूर्वी चंपारण: बिहार की पावन धरती आज एक बार फिर वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई। पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया में निर्माणाधीन एशिया के सबसे बड़े 'विराट रामायण मंदिर' परिसर में विश्व के सबसे ऊंचे और भारी शिवलिंग—सहस्त्रलिंगम—का भव्य अभिषेक और स्थापना अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक और अलौकिक क्षण के साक्षी बने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आदिदेव महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना की।
आध्यात्मिक भव्यता, 210 टन वजनी काले ग्रेनाइट का चमत्कार
यह शिवलिंग अपनी संरचना और विशालता में अद्वितीय है। 33 फीट ऊंचे और लगभग 210 टन (2.10 लाख किलोग्राम) वजनी इस महालिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में काले ग्रेनाइट के एक ही विशाल पत्थर (मोनोलिथ) को तराश कर बनाया गया है। लगभग 2500 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर बिहार पहुंचा यह शिवलिंग साक्षात कैलाश पर्वत की दिव्यता का बोध कराता है।
अष्ट नदियों के जल से महाभिषेक, गूंज उठे वैदिक मंत्र
वाराणसी और अयोध्या से पधारे प्रकांड विद्वानों की उपस्थिति में 108 कलशों से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया। इस अनुष्ठान में गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, नर्मदा, कावेरी और बिहार की जीवनरेखा गंडक सहित आठ पवित्र नदियों के जल का उपयोग किया गया। यह जल कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, प्रयागराज और रामेश्वरम जैसे महान तीर्थों से लाया गया था। शास्त्रोक्त पद्धति से हुए इस पूजन का उद्देश्य 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना के साथ समस्त सृष्टि का कल्याण करना है।
वीवीआईपी उपस्थिति और सांस्कृतिक शिलान्यास
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार और महावीर मंदिर सचिव आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र सायन कुणाल, पुत्रवधू संसद शांभवी चौधरी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने इस महायज्ञ में आहुति दी। मुख्यमंत्री ने न केवल पूजा की, बल्कि परिसर में प्रस्तावित अत्याधुनिक गौशाला, संस्कृत विश्वविद्यालय और विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाओं का शिलान्यास भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन सनातन संस्कृति की अटूट आस्था और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है।
विराट रामायण मंदिर, आस्था का नया वैश्विक केंद्र
लगभग 120 एकड़ में फैल रहा यह मंदिर परिसर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना होगा। 270 फुट की ऊंचाई, 18 शिखर और 22 मंदिरों वाला यह परिसर अयोध्या और काशी के समकक्ष एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्र बनेगा। महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित इस परियोजना के माध्यम से रामायण काल की स्मृतियों को जीवंत किया जा रहा है।
क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस महा-उत्सव को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। ड्रोन के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई और दूरदर्शन व यूट्यूब पर इसका सीधा प्रसारण विश्वभर में देखा गया। स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंदिर से न केवल बिहार के सांस्कृतिक गौरव का पुनरुत्थान होगा, बल्कि पर्यटन के माध्यम से हजारों नए रोजगार सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी।
देर रात तक चलने वाली महाआरती और विशाल भंडारे के साथ यह उत्सव संपन्न होगा। 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से गुंजायमान कैथवलिया आज भक्ति और शक्ति का केंद्र बना हुआ है, जो आने वाली सदियों तक मानवता को शांति और सद्बुद्धि का संदेश देता रहेगा।







