लोकल डेस्क, राजीव कु. भारती |
- 150 से अधिक बालिकाएँ जुड़ीं, स्वच्छता, पोषण और पीरियड्स से जुड़े मिथकों पर दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
सिवान। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर द बेटर सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा “प्रोजेक्ट रंजीता 2.0” के अंतर्गत मासिक धर्म स्वास्थ्य को लेकर एक विशेष ऑनलाइन जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किशोरियों और बालिकाओं को मासिक धर्म (Menstrual Health) के प्रति जागरूक करना, पीरियड्स के दौरान स्वच्छता बनाए रखने और सही व संतुलित आहार के महत्व को समझाना था।
इस पहल से जुड़ते हुए 150 से अधिक बालिकाएँ ‘प्रोजेक्ट रंजीता’ समूह का हिस्सा बनीं। इनमें से कई प्रतिभागियों ने ऑनलाइन सत्र में सक्रिय भागीदारी कर मासिक धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। कार्यशाला में बालिकाओं को पीरियड्स से जुड़े मिथकों को दूर करने, सही स्वच्छता अपनाने और इस दौरान शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक पोषण के बारे में विस्तार से बताया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. ऋषिका शर्मा रहीं। उन्होंने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, पीरियड्स से जुड़ी सामान्य समस्याओं और इस दौरान संतुलित आहार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही प्रतिभागियों के सवालों का समाधान करते हुए उन्हें सही जानकारी और जागरूकता प्रदान की। इस कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोजेक्ट हेड सोनी और ज्ञानज्योति के नेतृत्व में किया गया। उनकी सक्रिय भूमिका और फाउंडेशन की टीम के सहयोग से यह कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। फाउंडेशन के संस्थापक राज आर्यन ने बताया कि प्रोजेक्ट रंजीता का उद्देश्य समाज में बालिकाओं को जागरूक, शिक्षित और सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि द बेटर सोसाइटी फाउंडेशन आगे भी शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐसे जागरूकता अभियान चलाता रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में प्रोजेक्ट रंजीता के माध्यम से और अधिक बालिकाओं तक पहुँच बनाकर उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस सामाजिक पहल में Menstrocare Pvt. Ltd. का विशेष सहयोग रहा, जिनके समर्थन से इस कार्यशाला का सफल आयोजन संभव हो सका। फाउंडेशन की टीम और स्वयंसेवकों ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पहल न केवल बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की ओर भी एक सकारात्मक प्रयास है।







