नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार
कोलकाता, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 2,400 कंपनियों की तैनाती का निर्णय लिया है। इसे राज्य के चुनावी इतिहास की सबसे व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक माना जा रहा है।
यह तैनाती 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के मतदान के दौरान और उसके बाद संभावित हिंसा को रोकने के उद्देश्य से की जा रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बलों की तैनाती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब तक 480 कंपनियां राज्य में पहुंच चुकी हैं। शेष 1,920 कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से भेजा जाएगा।
तैनाती कार्यक्रम के तहत 31 मार्च तक 300 कंपनियां पहुंचेंगी। इसके बाद 7 और 10 अप्रैल को 300-300 कंपनियां, 13 अप्रैल को 277 कंपनियां और 17 अप्रैल को 743 कंपनियां राज्य में तैनात की जाएंगी, जिससे मतदान से पहले पूरी तैनाती सुनिश्चित हो सके।
सूत्रों ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भी लगभग 500 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी, ताकि परिणाम के बाद किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके।
चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। केंद्रीय बलों को मतदान केंद्रों के भीतर हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया है, यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है। मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायत मिलने पर संबंधित बूथों पर पुनर्मतदान भी कराया जा सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील और अति-संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली है। कोलकाता में करीब 30 कंपनियां पहले ही पहुंच चुकी हैं और मतदाताओं में विश्वास बढ़ाने के लिए विभिन्न इलाकों में रूट मार्च शुरू कर दिया गया है।
पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की है और अन्य जिलों में भी इसी तरह के रूट मार्च और सुरक्षा अभ्यास आयोजित किए जाएंगे, ताकि चुनावी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सके।







