लोकल डेस्क, एन के सिंह।
जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल के नेतृत्व में पुनरुद्धार की कवायद तेज,
चीनी मिल शुरू होने से हजारों किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
पूर्वी चंपारण: वर्षों से खामोश पड़ी बाराचकिया चीनी मिल की चिमनियों से एक बार फिर धुआं उठने और स्थानीय किसानों की किस्मत चमकने की उम्मीदें अब परवान चढ़ने लगी हैं। 10 अप्रैल 2026 को इस दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल करते हुए नई दिल्ली से आई NFCSF की विशेषज्ञ टीम ने पूरे क्षेत्र का सघन 'एरिया स्टडी' दौरा किया।
इस दौरान टीम ने बंद पड़ी पुरानी चीनी मिल के खंडहरों का बारीकी से निरीक्षण किया और नई मिल की स्थापना के लिए प्रस्तावित भूमि की उपयुक्तता को तकनीकी नजरिए से परखा। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर कड़ा प्रशासनिक रुख दिखाते हुए स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जिला प्रशासन किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने टीम को आश्वस्त किया कि भूमि सत्यापन से लेकर तमाम विभागीय दस्तावेजी प्रक्रियाओं को युद्ध स्तर पर पूरा कर हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
इस उच्चस्तरीय सर्वेक्षण के दौरान NFCSF की टीम ने केवल जमीन ही नहीं, बल्कि कृषि विभाग और अन्य तकनीकी विभागों जैसे लघु सिंचाई, माइनर इरिगेशन, जल निस्सरण और केनाल डिवीजन के अधिकारियों के साथ बैठकर आंकड़ों का जाल बुना। टीम ने धरातल पर जाकर किसानों से सीधा संवाद किया और गन्ना उत्पादन की वर्तमान स्थिति, उसकी आपूर्ति व्यवस्था और भविष्य की संभावनाओं का गहराई से आकलन किया। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने दो-टूक शब्दों में कहा कि प्रशासन इस परियोजना को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भूमि सत्यापन एवं विभागीय समन्वय जैसे कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। उनका मानना है कि यदि यह मिल दोबारा शुरू होती है, तो यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित होगी, बल्कि चंपारण के हजारों किसानों और युवाओं के लिए रोजगार का महाद्वार भी खोल देगी।
दौरे के अंत में दिल्ली से आई टीम ने अपनी प्रारंभिक फीडबैक रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी, जिसमें बाराचकिया क्षेत्र में चीनी मिल स्थापना की संभावनाओं को बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक बताया गया है। टीम के विशेषज्ञों ने आगे की राह के लिए कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव भी साझा किए हैं। जिलाधिकारी ने इस पहल को क्षेत्र के विकास के लिए एक मिल का पत्थर बताते हुए कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में यह कदम निर्णायक साबित होगा। प्रशासन की इस सक्रियता और NFCSF के सकारात्मक रुख ने चकिया के किसानों में एक नई ऊर्जा भर दी है, जिससे अब यह स्पष्ट हो गया है कि बंद पड़ी मिल के दिन बहुरने वाले हैं और बाराचकिया एक बार फिर चीनी उत्पादन के नक्शे पर मजबूती से उभरने को तैयार है।







