बिहार की सभी पंचायतों में लगेंगे “सहयोग शिविर”, लोगों को पंचायत स्तर पर मिलेगी सरकारी सुविधा
स्टेट डेस्क, मुस्कान सिंह।
पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए बड़ी पहल की है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि अब सभी पंचायतों में महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को “सहयोग शिविर” लगाए जाएंगे। “सबका सम्मान, जीवन आसान” अभियान के तहत शुरू होने वाली इस व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत देना और पंचायत स्तर पर ही प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है।
सरकार का मानना है कि गांवों में रहने वाले लोगों को अक्सर छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रखंड और जिला कार्यालयों तक जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। इसी समस्या को देखते हुए पंचायत स्तर पर “सहयोग शिविर” आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इन शिविरों में लोगों की शिकायतों और आवेदनों का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
बुधवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस योजना के सफल संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न जिलों से प्राप्त शिकायतों, लंबित मामलों और उनके निपटारे की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिविरों में आने वाले लोगों को बिना देरी के पारदर्शी और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, “सहयोग शिविर” के दौरान राशन कार्ड, पेंशन, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, भूमि विवाद, राजस्व संबंधित मामले और अन्य प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि जरूरतमंद नागरिक योजनाओं का लाभ आसानी से उठा सकें।
सरकार ने इस पहल को “गुड गवर्नेंस” की दिशा में अहम कदम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रशासन और आम जनता के बीच विश्वास मजबूत होगा और लोगों की समस्याओं का निपटारा तेजी से हो सकेगा। पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध होने से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने “सहयोग शिविर” के आयोजन और समन्वय की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हर पंचायत में शिविर का नियमित आयोजन सुनिश्चित किया जाए और प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए। सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से ग्रामीण प्रशासन अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगा।







