लोकल डेस्क, नीतीश कुमार।
बिहार में पंचायत चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड में ग्रामीण क्षेत्रों के चाय की दुकानों से लेकर चौपालों तक चुनावी माहौल गर्म है। संभावित आरक्षण सूची और रोस्टर का इंतजार सभी उम्मीदवारों को बेचैन किए हुए है।
मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त होने वाला है। सूत्रों के मुताबिक सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। जिला प्रशासन और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी आधिकारिक आरक्षण सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन अटकलें जोरों पर हैं।
उम्मीदवारों ने शुरू किया जनसंपर्क
संभावित प्रत्याशी गांव-गांव घूमकर जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। समर्थकों के साथ रणनीति बनाई जा रही है और विकास के वादों के साथ मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश हो रही है। कई मौजूदा मुखिया, सरपंच और सदस्य आरक्षण में बदलाव के कारण क्षेत्र बदलने या परिवार के सदस्य को मैदान में उतारने की तैयारी में जुटे हैं।
चुनावी चर्चा अब केवल चौपालों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी प्रचार का अहम जरिया बन गए हैं। उम्मीदवार अपने संदेश और वादों को डिजिटल माध्यम से भी लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
पदों की संख्या और आरक्षण की तैयारी
केवटी प्रखंड में जिला परिषद के 4, मुखिया और सरपंच के 26-26, पंचायत समिति सदस्य के 36 तथा वार्ड सदस्य और पंच के 355-355 पद समेत कुल 802 पद हैं। इस बार आरक्षण निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है।
प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी ने बताया कि अभी केवल प्रपत्र-एक का प्रकाशन हुआ है। आरक्षण रोस्टर को लेकर विभाग से कोई नया निर्देश नहीं आया है।







