बिहार में नोटरियों के अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई: अधिवक्ता प्रयाग कुमार ने मुख्यमंत्री से की 5 सूत्री मांगें
स्टेट डेस्क, राजीव कु. भारती ।
फर्जी नोटरी मुहरों से हो रही करोड़ों के राजस्व की चपत, नवनियुक्त नोटरियों ने खोला मोर्चा
सीवान। बिहार में नवनियुक्त नोटरियों की कार्य-सुविधा, सुरक्षा और राज्य में बड़े पैमाने पर हो रही राजस्व चोरी को लेकर सीवान के वरिष्ठ अधिवक्ता सह नोटरी प्रयाग कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित मुख्य सचिव और विधि विभाग को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। प्रयाग कुमार ने राज्य के सभी जिलों में कार्यरत नोटरियों की दयनीय स्थिति और न्यायिक प्रक्रिया में हो रहे खिलवाड़ को लेकर सरकार को आईना दिखाया है।
प्रमुख मांगें और उठाए गए मुद्दे:
1. कोषागार में नोटरी टिकटों की भारी किल्लत
प्रयाग कुमार ने पत्र में स्पष्ट किया कि राज्य के अधिकांश जिला मुख्यालयों के कोषागार (Treasury) में नोटरी टिकट उपलब्ध नहीं हैं। इससे नवनियुक्त नोटरियों को कार्य करने में भारी असुविधा हो रही है और सरकार को मिलने वाला स्टाम्प शुल्क भी प्रभावित हो रहा है।
2. फर्जीवाड़े पर प्रहार: प्रखंड स्तर पर हो जाँच
अधिवक्ता ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि सीवान सहित पूरे बिहार में अपंजीकृत व्यक्ति 'फर्जी नोटरी मुहर' का उपयोग कर रहे हैं। यह न केवल आपराधिक कृत्य है, बल्कि सरकार के राजस्व की सीधी चोरी है। उन्होंने मांग की है कि:
त्रैमासिक जाँच: प्रत्येक 3 महीने पर प्रखंड स्तर पर सघन छापेमारी और जाँच हो।फर्जी मुहर बनाने और चलाने वालों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो।
3. पहचान, प्रशिक्षण और मानकीकृत आईडी कार्ड
नोटरी के कार्यों की शुचिता बनाए रखने के लिए उन्होंने नवनियुक्त नोटरियों के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है। साथ ही, सुरक्षा के दृष्टिकोण से सरकार द्वारा जारी 'स्टेट लेवल मानकीकृत पहचान पत्र' की मांग की है।
4. कल्याणकारी योजनाएं और बुनियादी ढांचा
न्यायालय परिसरों में नोटरियों के बैठने के लिए कोई गरिमामय स्थान नहीं होने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की तरह नोटरियों को भी बैठने की जगह मिलनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने सभी कार्यरत नोटरियों के लिए सामूहिक बीमा की योजना लागू करने की पुरजोर वकालत की है।
5. कार्यों की विधिक अनिवार्यता
बैंकिंग और शपथ पत्रों के कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए प्रयाग कुमार ने सुझाव दिया कि नोटरी द्वारा प्रमाणित दस्तावेजों को ही अनिवार्य रूप से मान्य किया जाए, ताकि बिचौलियों और फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो सके। अधिवक्ता सह नोटरी प्रयाग कुमार ने कहा कि बिहार के नवनियुक्त नोटरी राज्य के विकास और न्यायिक पारदर्शिता में भागीदार बनना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों का अभाव और फर्जीवाड़े का बोलबाला उनके मनोबल को तोड़ रहा है। सरकार को जल्द से जल्द इन विसंगतियों को दूर करना चाहिए। बतादे कि प्रयाग कुमार की इस पहल को राज्य के अन्य जिलों के नोटरियों का भी समर्थन मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन सुझावों पर अमल करती है, तो न केवल विधिक दस्तावेज सुरक्षित होंगे, बल्कि सरकार के खजाने में राजस्व की भी भारी वृद्धि होगी।







