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बीआरटीपी-जीविका-3 से लाखों रोजगार के अवसर, छोटे उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना

3000 करोड़ की बीआरटीपी-जीविका-3 परियोजना से बदलेगा ग्रामीण बिहार का आर्थिक परिदृश्य

- योजना के तहत छह वर्षों में स्थापित होंगे राज्य में महिला सशक्तिकरण के कई नई आयाम
- कुल तीन हजार करोड़ की लागत से दिया जाएगा छोटे-छोटे उद्योग, कारोबार को बढ़ावा, कौशल विकास पर भी तैयार की गई है एक वृहद योजना

पटना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं विश्व बैंक की ओर से वित्त पोषित पूर्ववर्ती परियोजनाओं की मजबूती के लिए राज्य में एक नई बिहार ग्रामीण परिवर्तन परियोजना (बीआरटीपी)-जीविका-3 को मंजूरी दी गई है। ग्रामीण  विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि योजना को मंजूरी देने का अद्देश्य राज्य में उत्पादकता, आय-रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना और स्वयं सहायता समूह के उत्पादों में वृद्धि करना है।

परियोजना की कार्य अवधि छह वर्षों की है, जिसका क्रियान्वयन वित्तीय वर्ष 2026-27 से किया जाएगा। इसकी लागत कुल तीन हजार करोड़ रुपए निर्धारित है। कुल राशि का 70 फीसदी विश्व बैंक और 30 फीसदी राज्य सरकार वहन करेगी। प्रधान सचिव ने कहा कि तय लक्ष्य के अनुसार कृषि उत्पादों, पशुधन एवं गैर कृषि उत्पाद-सेवाओं का बाजार, मूल्य श्रृंखला अवसंरचनाओं का विकास, ब्रांडिंग, विपणन, डिजिटल एवं वित्तीय आधारभूत संरचनाओं का विकास के साथ सार्वजनिक-निजी-सामुदायिक मॉडल से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वाणिज्य की एक नई राह बनेगी। इसके साथ ही उद्यमिता विकास के लिए अनेक आधारभूत संरचनाओं को विकसित किया जाएगा।
       
उन्होंने कहा कि बीआरटीपी-जीविका-3 के कई अपयव हैं। इसमें प्रमुख रूप से बहुक्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए स्वावलंबी सामुदायिक संस्थाओं, आर्थिक, कलस्टर एवं उद्यमिता, डिजिटल और प्रोद्योगिकी तंत्र के विकास और मजबूती के साथ परियोजना प्रबंधन है। उपरोक्त अपवयों के तहत बिहार में स्वयं सहायता समूह, ग्राम और संकुल संगठनों के साथ उत्पादक कंपनियों का क्षमता वर्धन किया जाएगा। इसके सहारे राज्य में सोलर मार्ट, कृषि, वानिकी, मत्स्य उत्पादन और गैर-कृषि आधारित उद्योग, अद्यमी और उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्य रूप से मत्स्य पालन, डेयरी, कुक्कुट, मछली एवं मधुमक्खी पालन के व्यवसाय को नई पहचान मिलेगी। 
       
प्रधान सचिव ने बताया कि इसी के साथ राज्य में गैर-कृषि आधारित उद्यमों को भी बढ़ावा देने की सरकार की योजना है। परियोजना के तहत ग्रामीण स्तर पर गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, सीड प्लांट, प्रसंस्करण इकाइयों का विकास, हैचरी, चिलिंग प्लांट के साथ बाजारों तक पहुंच के लिए डिजिटल प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा। इससे उद्यमी निजी क्षेत्र के साझेदारों के साथ मिलकर काम कर सकेंगे और उनकी उत्पादकता में अपेक्षित वृद्धि होगी।

संकुल संगठनों को स्वावलंबी बनाने की तैयारी* 
प्रधान सचिव ने बताया कि बीआरटीपी-जीविका-3 के तहत कुल एक हजार संकुल स्तरीय संगठनों को स्वावलंबी बनाने की तैयारी है। इससे छोटे-छोटे उद्योग, धंधों से जुड़े परिवारों को सामाजिक, वित्तीय सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी। संकुल स्तरीय संगठन को लाभ का अंश सामुदायिक सेवाओं में पुनर्निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे समूह के सदस्य, ग्रामीण उद्यमियों और मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान सेवाओं को गति मिलेगी।

बीआरटीपी-जीविका-3  के तहत छह वर्षों में खर्च की जाने वाली राशिः
वर्ष                राशि (करोड़ में)
2026-27    300
2027-28    450
2028-29    600 
2029-30    900 
2030-31    450 
2031-32    300 

कोट में
बिहार ग्रामीण परिवर्तन परियोजना जीविका परिवार और समूहों के विकास में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने का काम करेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र के छोटे-बड़े उद्योग, धंधों को मजबूती मिलेगी। हजारों, लाखों रोजगार के अवसर बनेंगे। विशेषकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित होगा।
– श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री