स्टेट डेस्क, नीतीश कुमार।
बिहार के केसरिया महोत्सव में सांस्कृतिक रंग, बौद्ध धर्म पर हुई विचार गोष्ठी। केसरिया महोत्सव में झलकी बिहार की संस्कृति, डॉ. साकेत रमण ने रखें बौद्ध दर्शन पर अपने विचार।
मोतिहारी/केसरिया: पूर्वी चंपारण के केसरिया में आयोजित केसरिया महोत्सव 2026 के दूसरे दिन कार्यक्रमों की श्रृंखला में शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्म का सुंदर संगम देखने को मिला। इसके बाद बौद्ध धर्म पर परिचर्चा आयोजित की गई। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. साकेत रमण (प्राध्यापक, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय), प्रो. शैलेश कुमार सिंह (दर्शनशास्त्र विभाग, एएन कॉलेज, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना) तथा डॉ. परमेश्वर ओझा (केसरिया महोत्सव के संस्थापक आयोजक) उपस्थित रहे।
बतौर मुख्य वक्ता डॉ. साकेत रमण ने अपने संबोधन में कहा कि वे बिहार की ऐतिहासिक धरती से जुड़े होने पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने “बुद्धं शरणं गच्छामि” का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध कभी भी सनातन दर्शन परम्परा के विरोधी नहीं थे, बल्कि वे वेदों के अव्याकृत प्रश्न से इतर मानव विवेक और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाते थे। जिसमें दया, करुणा, सद्भाव, अहिंसा की अनुपालना के साथ संपूर्ण विश्व के कल्याण की कामना थी। उन्होंने एक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि बचपन में राजकुमार सिद्धार्थ ने जब संसार के दुख और मोह-माया को देखा, तभी उनके मन में वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने मानव कल्याण के मार्ग की खोज शुरू की। डॉ. रमण ने बौद्ध धर्म के पांच शील, चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग पर व्यापकता के साथ प्रकाश डाला।
इससे पहले दिनभर चले विभिन्न आयोजनों में स्थानीय लोगों के साथ-साथ विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। दोपहर में विभिन्न सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिसमें क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके अंतर्गत छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने छठ गीत, बेटी पर आधारित गीत और “आजू मिथिला नगरिया” जैसे लोकगीत प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन की झलक साफ देखने को मिली।
इसके बाद बुद्ध पर आधारित आशु भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने भगवान बुद्ध के जीवन, उनके विचारों और उनके संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
संध्या में स्थानीय कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, तत्पश्चात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कई प्रसिद्ध कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजन से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। महोत्सव के आगामी के आगामी दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की योजना है।






