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भाई की हत्या माँ की दवा लटका मिला फरार कातिल

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

पूर्वी चम्पारण: जिले के पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के राजेपुर नवादा पंचायत के श्रीपुर गांव स्थित लीची के बगान ने शनिवार की सुबह जो दृश्य देखा, उसने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डुबो दिया। एक लीची के पेड़ से दुपट्टे के सहारे लटका हुआ था, वह बदनसीब युवक, जिसने सिर्फ दो रात पहले, अपनी माँ की दवा के मामूली से खर्च पर हुए झगड़े में अपने बड़े भाई को चाकू मार दिया था।

यह कहानी है सकल साह और उनके बड़े भाई गगन साह की। बुधवार की रात, पताही थाना क्षेत्र के बेतौना गाँव में, एक छोटी-सी बात ने भयानक रूप ले लिया। माँ की दवा पर 4,500 अधिक खर्च होने को लेकर दोनों भाइयों में तीखी बहस हुई। यह मामूली विवाद, जो शायद प्रेम और सद्भाव से सुलझ सकता था, क्रोध के क्षणिक आवेग में बदल गया। सकल ने चाकू उठाया और गगन पर हमला कर दिया। गगन की तत्काल मौत हो गई। अपने ही भाई के खून से सने सकल ने, डर और पश्चाताप से भरकर घर छोड़ दिया और अँधेरे में कहीं गायब हो गया।
दो दिनों तक पुलिस और परिवार उसकी तलाश में भटकते रहे। किसी को नहीं पता था कि वह कहाँ गया। उसके ससुराल वाले, जो राजेपुर नवादा पंचायत में ही रहते हैं, भी अनभिज्ञ थे।
लेकिन शनिवार की सुबह, यह दर्दनाक खोज तब पूरी हुई जब पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के श्रीपुर गाँव में मवेशियों के लिए चारा काटने गए ग्रामीणों ने उसे एक लीची के पेड़ से लटका पाया। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष अशोक शाह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे।
सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब मृतक सकल साह के नाबालिग पुत्र और पुत्री अपने पिता के शव की पहचान करने के लिए पहुँचे। पिता, जो कातिल था, अब खुद मृत था। दोनों बच्चों के लिए यह कैसा हृदय विदारक मंजर था—एक तरफ बड़े चाचा की हत्या का गम और दूसरी तरफ अपने पिता का यह भयानक अंत।
थानाध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल मोतिहारी भेज दिया गया है। उन्होंने कहा, "फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह हत्या है या आत्महत्या। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। लेकिन, जिस तरह से एक छोटे से पारिवारिक झगड़े ने दो दिनों के भीतर एक परिवार के दो सदस्यों की जान ले ली, यह बेहद दुखद और चौंकाने वाला है। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है।"
इस घटना ने पूरे मोतिहारी में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या 4,500 की कीमत दो जिंदगियों से ज्यादा थी? और क्या यह अपराधबोध था जिसने सकल को अंततः अपने भाई की राह पर चलने को मजबूर कर दिया? परिवार में मातम पसरा है और हर कोई ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि इस भयानक दुर्भाग्य की कहानी यहीं खत्म हो।