क्राइम डेस्क, प्रीति पायल |
भागलपुर व्यवहार न्यायालय (सिविल कोर्ट) को सोमवार, 9 फरवरी 2026 को ईमेल के जरिए बम विस्फोट की धमकी मिली, जिसके बाद पूरे न्यायालय परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और कोर्ट परिसर की सुरक्षा तत्काल बढ़ा दी गई।
प्राप्त ईमेल कोर्ट के प्रशासनिक अधिकारी अथवा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आधिकारिक मेल आईडी पर भेजा गया था। इसमें आरडीएक्स बम से कोर्ट को उड़ाने की चेतावनी दी गई थी और दावा किया गया था कि परिसर में चार बम लगाए गए हैं, जो किसी भी वक्त विस्फोट कर सकते हैं।
धमकी देने वाले ने ईमेल में अपना नाम “दिनाकरण” या “अरुण कुमार” बताया है। संदेश में तमिलनाडु के डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन का उल्लेख किया गया है, साथ ही तमिलनाडु पुलिस के कुछ कांस्टेबलों से जुड़े कथित विवाद का जिक्र भी किया गया है। इस तरह की भाषा पहले अन्य राज्यों की अदालतों को भेजी गई धमकी भरे ईमेल से मिलती-जुलती बताई जा रही है।
एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि धमकी मिलते ही आम लोगों का कोर्ट में प्रवेश रोक दिया गया। पूरे परिसर को खाली कराया गया और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। बम निरोधक दस्ता और जांच एजेंसियों ने हर कोने की सघन तलाशी शुरू कर दी।
इस घटना का असर न्यायिक कार्यों पर भी पड़ा। कई मामलों की सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। राज्य के अन्य जिलों की तरह भागलपुर कोर्ट का कामकाज भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा।
प्रशासन का कहना है कि यह घटना हाल के दिनों में बिहार की विभिन्न अदालतों को मिली ईमेल धमकियों की कड़ी का हिस्सा है। जनवरी 2026 से भागलपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, सिवान समेत कई जिलों की अदालतों को इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं। 9 फरवरी को भी औरंगाबाद और पटना समेत अन्य स्थानों पर ऐसी ही चेतावनियां मिलीं, जिसके बाद राज्यभर में अलर्ट जारी किया गया।
फिलहाल जांच के दौरान कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला है। साइबर सेल धमकी भेजने वाले की पहचान के लिए ईमेल के आईपी एड्रेस और लोकेशन की जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर इसे अफवाह या फर्जी धमकी माना जा रहा है, लेकिन सुरक्षा के स्तर पर कोई भी ढिलाई नहीं बरती जा रही है।







