विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध-प्रदर्शनों को लेकर एक बार फिर विवादित टिप्पणी की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि जो लोग इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं, उन्हें वह भारत की तरह ही पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं। उनके इस बयान ने पहले से तनावपूर्ण माहौल के बीच राजनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया है।
एक स्थानीय टीवी चैनल को दिए गए साक्षात्कार में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों और भारत के बीच वह कोई अंतर नहीं देखते। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रदर्शनकारियों को भी उसी श्रेणी में रखा जाना चाहिए, जिस तरह पाकिस्तान भारत को अपना विरोधी मानता है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत या समझौते की संभावना से भी इनकार कर दिया और कहा कि सरकार ऐसे लोगों के साथ किसी प्रकार का नरम रुख अपनाने के पक्ष में नहीं है।
रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रतिबंधित संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) के नेतृत्व में निकाले जा रहे विरोध मार्च पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हाल के वर्षों में पीओके में हुई यह सबसे गंभीर और हिंसक घटनाओं में से एक मानी जा रही है, जिसने पूरे क्षेत्र में असंतोष को और बढ़ा दिया है।
मंगलवार को जेएएसी के हजारों समर्थकों ने रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की थी। संगठन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण पीओके के स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां क्षेत्र की सरकार के गठन में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रही हैं। उनका कहना है कि केवल पीओके के स्थायी निवासियों को ही वहां की विधानसभा चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।
जेएएसी का दावा है कि लगभग पांच हजार लोग शांतिपूर्ण ढंग से मार्च में शामिल थे, लेकिन इसी दौरान सुरक्षा बलों ने उन पर गोलीबारी कर दी। संगठन के अनुसार इस घटना में उसके कम से कम 14 कार्यकर्ताओं की मौत हुई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में जेएएसी के संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं। संगठन ने इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने का प्रयास बताया है।
पीओके में बीते कई सप्ताह से लगातार विरोध-प्रदर्शन जारी हैं और हालिया घटना के बाद वहां का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, पांच जून से शुरू हुए आंदोलन और उसके बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 80 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इससे पहले सामने आए आंकड़ों में 40 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह सुरक्षाकर्मी शामिल थे। लगातार बढ़ती हिंसा और राजनीतिक टकराव के बीच क्षेत्र की स्थिति पर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।







