विदेश डेस्क, एन के सिंह।
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72 घंटे तक रहेगा सख्त पहरा, केवल आपातकालीन सेवाओं को मिलेगी छूट।
रक्सौल: नेपाल में आगामी 5 मार्च 2026 को होने वाले प्रतिनिधि सभा के आम चुनावों को लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। लोकतंत्र के इस महापर्व को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से भारत और नेपाल के प्रशासन ने एक साझा रणनीति तैयार की है। इसके तहत कल से भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा, जो अगले 72 घंटों तक प्रभावी रहेगा।
हाई-प्रोफाइल बैठक में बनी सुरक्षा की रणनीति
इस महत्वपूर्ण निर्णय की नींव बीरगंज (परसा) स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) के सभा भवन में आयोजित 'इंडो-नेपाल बॉर्डर कॉर्डिनेशन कमेटी' की उच्चस्तरीय बैठक में रखी गई। परसा के जिलाधिकारी भोला दहाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल और एसपी स्वर्ण प्रभात ने किया। बैठक में पश्चिमी चंपारण के वरिष्ठ अधिकारियों सहित दोनों देशों के सुरक्षा बलों के आला अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य केंद्र चुनाव के दौरान सीमा पार से होने वाली किसी भी संभावित अवांछित गतिविधि को रोकना था।
72 घंटे का 'कड़ा घेरा' और आवाजाही पर रोक
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, मतदान से 72 घंटे पहले ही अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सामान्य आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाओं, जैसे एम्बुलेंस और जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति वाले वाहनों को ही विशेष जांच के बाद आने-जाने की अनुमति दी जाएगी। सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल प्रहरी के जवान संयुक्त रूप से ज्वाइंट पेट्रोलिंग करेंगे ताकि मुख्य मार्गों के अलावा पगडंडियों और चोर रास्तों से होने वाली घुसपैठ पर लगाम लगाई जा सके।
तकनीकी निगरानी और शराबबंदी पर सख्ती
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जा रही है। सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति के पहचान पत्रों की सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आगामी होली के त्योहार और चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में शराब की दुकानों के संचालन औरज मादक पदार्थों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अपराध और अवैध नेटवर्क पर 'प्रहार'
बैठक में केवल चुनावी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा चुनौतियों पर भी गंभीर विमर्श हुआ। तीसरे देशों के नागरिकों की अवैध घुसपैठ, जाली भारतीय मुद्रा (FICN), हवाला कारोबार, साइबर अपराध और हथियारों की तस्करी जैसे मुद्दों पर दोनों देशों ने 'त्वरित सूचना आदान-प्रदान' (Information Sharing) की प्रणाली को और मजबूत करने पर सहमति जताई। नारकोटिक्स के अवैध व्यापार को रोकने के लिए खुफिया तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है।
अधिकारियों का वक्तव्य
"लोकतंत्र की सफलता के लिए शांतिपूर्ण चुनाव अनिवार्य हैं। भारत और नेपाल के बीच का समन्वय न केवल चुनावी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि सीमा पार अपराधों पर भी अंकुश लगाएगा। हम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस सुरक्षा घेराबंदी में प्रशासन का सहयोग करें।"







