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भारत विकास परिषद के 64वें स्थापना दिवस पर गोष्ठी एवं वृक्षारोपण

लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना।

  • सौनाहा माई मंदिर परिसर में औषधीय, फलदार एवं ऑक्सीजन उत्सर्जित करने वाले पौधों का रोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

रक्सौल: भारत विकास परिषद, शाखा–रक्सौल के तत्वावधान में शुक्रवार को परिषद के 64वें स्थापना दिवस के अवसर पर शहर के ऐतिहासिक सौनाहा माई मंदिर परिसर में गोष्ठी सह वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, सेवा और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद जी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर "वन्दे मातरम्" के सामूहिक गायन से हुआ। इसके पश्चात वनस्पति मंत्रोच्चार के बीच औषधीय, फलदार, छायादार तथा अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जित करने वाले विभिन्न पौधों का रोपण मंदिर के पुजारी चंद्रिका दास के संयोजन में किया गया। इस अवसर पर पुजारी चंद्रिका दास को अंगवस्त्र ओढ़ाकर कर सम्मानित किया गया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम में शाखा अध्यक्ष रजनीश प्रियदर्शी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विकास परिषद का 64वां स्थापना दिवस राष्ट्र के विकास, सेवा और संस्कार के लिए समर्पित प्रत्येक व्यक्ति के लिए गौरव का दिवस है। उन्होंने कहा कि "कोई भी संस्था यदि 64 वर्षों तक निरंतर, निर्विवाद और समाजहित में कार्य करती रहे तो यह स्वयं में उसकी सुदृढ़ विचारधारा, समर्पित कार्यकर्ताओं और तपस्वियों के अथक परिश्रम का प्रमाण है। सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना ही भारत विकास परिषद की वास्तविक शक्ति है।"

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाखा के पर्यावरण संयोजक विजय कुमार साह एवं सह संयोजक अजय कुमार ने संयुक्त रूप से परिषद की स्थापना यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 12 जनवरी 1963 को स्वामी विवेकानंद की जन्मशती के अवसर पर डॉ. सूरज प्रकाश, लाला हंसराज गुप्ता तथा अन्य दूरदर्शी राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्वों ने भारत विकास परिषद की स्थापना का संकल्प लिया। तत्पश्चात 10 जुलाई 1963 को परिषद को आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई, जिसे प्रत्येक वर्ष स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि परिषद आज भी स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रनिर्माण, सेवा और सांस्कृतिक जागरण के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

गोष्ठी में सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल कुमार सर्राफ एवं संस्कार संयोजक नीतेश कुमार सिंह संयुक्त रूप से कहा कि कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण केवल आवश्यकता नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। वृक्षारोपण जैसे अभियान समाज को स्वच्छ, स्वस्थ और हरित भविष्य की दिशा में प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने अधिकाधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया।

गौरतलब है कि समूचा कार्यक्रम  राष्ट्रभक्ति, सेवा, संस्कार एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश से ओत-प्रोत रहा तथा उपस्थित सदस्यों ने भारत विकास परिषद के मूल मंत्र "सम्पर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा एवं समर्पण" को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।
मौके पर सुनील कुमार, उमेश सिकारिया, बिमल कुमार सर्राफ, नीतेश कुमार सिंह, विजय कुमार साह, अरविंद जायसवाल, मनोज कुमार, विनोद कुमार, पुजारी चंद्रिका दास, राजू गुप्ता एवं कृष्णा प्रसाद समेत अनेक सदस्य उपस्थित रहे। इसकी जानकारी परिषद के संपर्क संयोजक उमेश सिकारिया एवं सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल कुमार सर्राफ ने दी है।