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भारत स्थित फर्जी कॉल सेंटर पर एफबीआई की बड़ी कार्रवाई, लाखों डॉलर ठगी का खुलासा

विदेश डेस्क, ऋषि राज

बोस्टन: अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने भारत में संचालित एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए उसे बंद कराने की कार्रवाई की है। इस नेटवर्क पर तकनीकी सहायता और बैंकिंग सुरक्षा के नाम पर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर लाखों डॉलर की ठगी करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह कई वर्षों से संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसके तार कई देशों तक फैले हुए थे।

एफबीआई बोस्टन के नेतृत्व में चली इस जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को माइक्रोसॉफ्ट सपोर्ट एजेंट, बैंक अधिकारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद वे पीड़ितों को कंप्यूटर वायरस, बैंक खाते की सुरक्षा या पहचान चोरी का डर दिखाकर उनसे बैंकिंग जानकारी, कार्ड डिटेल और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए पैसे ठग लेते थे।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का मुख्य निशाना अमेरिका और कनाडा में रहने वाले बुजुर्ग नागरिक थे। कई मामलों में पीड़ितों को घंटों तक फोन पर उलझाकर रखा जाता था और उन्हें विश्वास दिलाया जाता था कि उनके बैंक खाते खतरे में हैं। इसके बाद उन्हें नकली तकनीकी सहायता या सुरक्षा शुल्क के नाम पर भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता था। अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क ने करोड़ों रुपये के बराबर विदेशी मुद्रा की ठगी की।

एफबीआई ने कहा कि जांच के दौरान डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और तकनीकी डेटा के आधार पर नेटवर्क की पहचान की गई। कार्रवाई के दौरान भारत स्थित कई परिसरों पर छापेमारी की गई, जहां से कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर, मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में कुछ पूर्व कर्मचारियों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की संलिप्तता के संकेत भी मिले हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ आरोपियों को अदालत में दोषी भी ठहराया गया है। हालांकि जांच अभी जारी है और एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं।

एफबीआई ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या तकनीकी सहायता के नाम पर मांगी गई बैंकिंग जानकारी साझा न करें। एजेंसी ने कहा कि कोई भी सरकारी संस्था या प्रतिष्ठित कंपनी फोन पर पासवर्ड, ओटीपी या बैंक डिटेल नहीं मांगती। अधिकारियों ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता को सबसे बड़ा हथियार बताया है।