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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ: 'INDIA' गठबंधन संसद के बाहर जोरदार प्रदर्शन

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

नई दिल्ली में आज राजनीति की सरगर्मी चरम पर रही, जब कांग्रेस और 'INDIA' गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में संसद भवन परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। 'मकर द्वार' के पास एकत्र हुए विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार पर इस समझौते के जरिए किसानों के हितों की बलि चढ़ाने और देश की आर्थिक स्वायत्तता को गिरवी रखने का गंभीर आरोप लगाया।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने किया। उनके साथ क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (आरएसपी) के दिग्गज नेता एन.के. प्रेमचंद्रन, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और गठबंधन के कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे। प्रदर्शनकारी सांसदों के हाथों में बड़े-बड़े बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर "Narendra Surrendered?" और "किसानों के साथ धोखा बंद करो" जैसे नारे लिखे थे। परिसर में गूंजती नारेबाजी के बीच नेताओं ने मांग की कि सरकार इस 'ट्रैप डील' के प्रावधानों को तुरंत सार्वजनिक करे और संसद में इस पर विस्तृत चर्चा कराई जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक "विनाशकारी दस्तावेज" साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले सस्ते और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिए गए हैं, जिससे देश के करीब 2 करोड़ डेयरी किसानों और कपास उत्पादकों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी। विपक्ष का तर्क है कि अमेरिका को दी गई रियायतें भारतीय मंडियों में विदेशी फसलों की बाढ़ ला देंगी, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना असंभव हो जाएगा।
 

'भारत बंद' के प्रति एकजुटता

प्रदर्शन कर रहे सांसदों ने संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए 'भारत बंद' के प्रति भी अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। सांसदों ने कहा कि आज जब देश भर के किसान और मजदूर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं, तो संसद के भीतर और बाहर उनकी आवाज बुलंद करना विपक्ष का नैतिक कर्तव्य है। एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है।
संसद के बाहर हुए इस प्रदर्शन का असर सदन की कार्यवाही पर भी साफ दिखा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने व्यापार समझौते पर चर्चा की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने स्थगन प्रस्ताव देकर आरोप लगाया कि सरकार ने रूस से तेल खरीद और कृषि रियायतों के मामले में देश को अंधेरे में रखा है।
कुल मिलाकर, 12 फरवरी का यह दिन मोदी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी तकरार का गवाह बना, जहां एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों के साथ एक "रणनीतिक विश्वासघात" करार दे रहा है।