विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। भारत और उत्तरी यूरोप के पांच देशों—फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क—के समूह नॉर्डिक देशों के साथ संबंधों को ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन आधारित रणनीतिक साझेदारी का नया स्वरूप दिया गया है। ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान लिया गया यह फैसला पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, सौर ऊर्जा, सतत विकास और अन्य उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल के बाद नॉर्डिक देशों की कंपनियों और निवेशकों की भारत में भागीदारी और निवेश बढ़ने की संभावना मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पांचों नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में हुए सम्मेलन में इस साझेदारी को दोनों क्षेत्रों के रिश्तों में एक अहम मोड़ माना गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंधों के “नए स्वर्णिम युग” की शुरुआत बताया। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं, जिनमें ऊर्जा, व्यापार, नवाचार, हरित तकनीक और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि नॉर्डिक देशों के साथ इस स्तर का बहुपक्षीय जुड़ाव भारत की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों में शामिल है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों ने संबंधों को ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में बदलने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग के माध्यम से आइसलैंड की जियो-थर्मल ऊर्जा और मत्स्य क्षेत्र की विशेषज्ञता, नॉर्वे की समुद्री अर्थव्यवस्था और आर्कटिक क्षेत्रों से जुड़ा अनुभव तथा अन्य नॉर्डिक देशों की समुद्री विज्ञान और सतत विकास संबंधी क्षमताओं को भारत के विशाल बाजार और प्रतिभा से जोड़ा जाएगा। उनके अनुसार यह साझेदारी न केवल दोनों पक्षों बल्कि वैश्विक स्तर पर बेहतर और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में योगदान देगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक तनाव और संघर्षों के बीच नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्डिक देश वैश्विक शांति, संघर्षों की शीघ्र समाप्ति और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करते रहेंगे। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के हालात का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सभी पक्ष शांति प्रयासों का समर्थन करते हैं। साथ ही उन्होंने बहुपक्षीय संस्थाओं में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर बल दिया और आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट एवं एकजुट रुख अपनाने की बात दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता या दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सम्मेलन के दौरान आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रोस्टाडाटिर ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भले ही भारत और आइसलैंड जैसे देशों के आकार, भौगोलिक स्थिति और आर्थिक पैमाने अलग हों, फिर भी दोनों देशों के बीच सहयोग और साझा हितों की मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं। उनके मुताबिक यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब विभिन्न आकार और परिस्थितियों वाले देश मिलकर नई साझेदारियों और वैश्विक समाधान की दिशा में काम कर सकते हैं।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने जानकारी दी कि नॉर्डिक देशों के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने समर्थन को दोहराया है। पिछले एक दशक में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग चार गुना बढ़ा है, जबकि भारत में नॉर्डिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इन देशों के निवेश फंड भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से निवेश कर रहे हैं और भारत भी ऐसे निवेशों को आकर्षित करने के प्रयास लगातार कर रहा है।
हाल के वर्षों में भारत ने नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य ईएफटीए देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौतों को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अलावा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की प्रक्रिया में भी डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन जैसे देश महत्वपूर्ण भागीदार हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि “संबंध” शब्द का अर्थ भारत और नॉर्डिक देशों की सोच में समान भावनात्मक जुड़ाव दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भाषाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन कुछ शब्द और साझा मूल्य देशों को मजबूत रिश्तों में बांधने के लिए पर्याप्त होते हैं। नॉर्वे यात्रा और तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भागीदारी के बाद प्रधानमंत्री मोदी आगे की यात्रा के लिए रवाना हुए, जिसके साथ उनकी नॉर्वे यात्रा का समापन हुआ।







