नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली : भारत और न्यूजीलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए ‘रणनीतिक साझेदारी रोडमैप 2030’ की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान इस व्यापक रोडमैप पर सहमति बनी। इसके तहत राजनीतिक सहयोग, रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था, शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी, जनसंपर्क तथा क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग को छह प्रमुख स्तंभों के रूप में शामिल किया गया है। दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद बनाए रखने और आपसी साझेदारी को दीर्घकालिक एवं परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया।
दोनों देशों ने प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्री स्तर पर नियमित बैठकों को जारी रखने के साथ-साथ संसदीय और संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत समन्वय बढ़ाने, आपसी विश्वास को सुदृढ़ करने तथा साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार संवाद बनाए रखने पर भी सहमति बनी। दोनों पक्षों का मानना है कि यह रोडमैप आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग को रणनीतिक साझेदारी का अहम आधार मानते हुए दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा वार्ता, समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक गतिविधियों तथा हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसके साथ ही आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयास, साइबर सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक तथा आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के विकास जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग तंत्र को मजबूत करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए समन्वित प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
व्यापार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र आगे बढ़ाने, सीमा शुल्क सहयोग के माध्यम से व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा निवेश को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी। साथ ही बागवानी, वानिकी, पशुपालन, डेयरी, पर्यटन और सीधी हवाई संपर्क व्यवस्था को मजबूत कर आर्थिक संबंधों को नई गति देने का निर्णय लिया गया।
रणनीतिक साझेदारी रोडमैप में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत प्रवासी भारतीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देने, खेल, संस्कृति, पारंपरिक चिकित्सा और समुद्री सहयोग के माध्यम से संबंधों को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। दोनों देशों ने स्थानीय निकायों, सांस्कृतिक संस्थानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई, जिससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी जुड़ाव और विश्वास को और मजबूती मिल सके।
शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संस्थागत साझेदारी को विस्तार देने का भी निर्णय लिया गया है। दोनों देश कृषि, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी के बीच सहयोग व्यवस्था लागू करने पर भी सहमति बनी है।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों ने आसियान आधारित मंचों पर सहयोग बढ़ाने, नियम आधारित हिंद-प्रशांत व्यवस्था का समर्थन करने, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने तथा संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। न्यूजीलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी समर्थन दोहराया। दोनों सरकारों ने स्पष्ट किया कि ‘रणनीतिक साझेदारी रोडमैप 2030’ किसी प्रकार की वित्तीय प्रतिबद्धता या कानूनी रूप से बाध्यकारी दायित्व नहीं बनाता, बल्कि यह भविष्य के सहयोग के लिए एक साझा मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा।







