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भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निफ्टी 25,000 के स्तर से नीचे फिसला

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन 'ब्लैक वेडनेसडे' साबित हुआ। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार, 21 जनवरी 2026 को बाजार खुलते ही बिकवाली का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा कर दिए। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) में 1000 अंकों से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं निफ्टी-50 (NSE Nifty) अपने मनोवैज्ञानिक स्तर 25,000 के नीचे जाकर बंद हुआ। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और घरेलू बैंकिंग सेक्टर में मची उथल-पुथल ने निवेशकों के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है।

बाजार की शुरुआत आज सुबह सुस्ती के साथ हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि सेंसेक्स ने अपना 80,000 का स्तर खो दिया और दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट की सबसे मुख्य वजह बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के शेयरों में आई भारी कमजोरी रही। निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंकों के तिमाही नतीजों को लेकर बाजार में व्याप्त अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही लगातार निकासी ने आग में घी डालने का काम किया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स, जो पिछले कुछ समय से बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे, आज 3% से अधिक टूट गए, जिससे खुदरा निवेशकों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी का 25,000 के स्तर से नीचे जाना एक चिंताजनक संकेत है। यह स्तर बाजार के लिए एक मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा था, लेकिन इसके टूटने के बाद अब बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। बाजार में इस गिरावट के पीछे केवल घरेलू कारण ही नहीं हैं, बल्कि वैश्विक कारक भी जिम्मेदार हैं। अमेरिका में फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स से दूर कर दिया है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी ने भी महंगाई की चिंता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार की चाल पर पड़ा।

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आज केवल फार्मा और आईटी क्षेत्र के चुनिंदा शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाने की कोशिश की, लेकिन वे भी बाजार के चौतरफा दबाव को थामने में नाकाम रहे। बैंकिंग स्टॉक्स के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और रियल्टी सेक्टर में भी 2% से 4% तक की गिरावट देखी गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे हैवीवेट शेयरों में हुई गिरावट ने सूचकांक को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई।

विशेषज्ञों की सलाह है कि इस अस्थिरता के दौर में खुदरा निवेशकों को घबराहट में आकर कोई भी बड़ा फैसला नहीं लेना चाहिए। हालांकि बाजार में गिरावट आई है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से फंडामेंटली मजबूत शेयरों में निवेश के अवसर भी बन रहे हैं। बाजार की नजर अब कल होने वाले एक्सपायरी और आने वाले कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर टिकी है। यदि वैश्विक बाजारों से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलता है, तो आने वाले दिनों में बाजार में कंसोलिडेशन या और अधिक सुधार (Correction) देखने को मिल सकता है। आज की इस गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शेयर बाजार में जोखिम प्रबंधन (Risk Management) कितना अनिवार्य है।