नेशनल डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य |
मणिपुर: पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में जातीय हिंसा एक बार फिर गहराती नजर आ रही है। जनवरी 2026 से जुलाई के दूसरे सप्ताह तक नागा और कुकी समुदायों के बीच हुई हिंसक घटनाओं में अब तक 85 FIR दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि 24 लोगों की जान जा चुकी है और कम से कम 47 लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने राजधानी इंफाल से जुड़े पांच प्रमुख इलाकों को हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है।
गौरतलब है कि मई 2023 में इंफाल घाटी के मेइती समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अब उसी संघर्ष के बाद नागा और कुकी सशस्त्र समूहों के बीच बढ़ते टकराव, अपहरण, आगजनी और आर्थिक नाकेबंदी की घटनाओं ने राज्य में एक नए जातीय संकट को जन्म दे दिया है। राज्य के पहाड़ी जिलों में वर्ष 2026 की शुरुआत से ही तनाव लगातार बढ़ा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने पिछले छह महीने से अधिक समय में 214 से ज्यादा छापेमारी की और 75 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 19 लोगों को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
प्रशासन ने पांच इलाकों को माना सबसे संवेदनशील
मणिपुर प्रशासन ने पांच बड़े क्षेत्रों को हिंसा प्रभावित इलाकों के रूप में चिन्हित किया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जातीय संघर्ष अब सीमित दायरे तक नहीं रहा, बल्कि कई हिस्सों में फैल चुका है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी अपेक्षाकृत शांत रहा और इस दौरान कोई हताहत नहीं हुआ। पहली घटना फरवरी में उखरुल जिले में सामने आई, जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ। मार्च से हिंसा ने रफ्तार पकड़ी और अप्रैल में भी घटनाएं जारी रहीं। मई और जून के दौरान हालात सबसे ज्यादा गंभीर रहे, जबकि जुलाई में अब तक एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना मिली है। हालांकि, बीते छह महीनों के आंकड़े बताते हैं कि संघर्ष कई पहाड़ी जिलों तक फैल चुका है।
इन पांच इलाकों में सबसे ज्यादा तनाव
उच्च-स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, उखरुल-इंफाल-उखरुल रोड, कांगपोकपी-इंफाल-कोहिमा रोड, कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा से लगे गांव, तामेंगलोंग और कांगपोकपी के बीच के सीमावर्ती गांव तथा सेनापति और कांगपोकपी के बीच स्थित सीमावर्ती गांव सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। हाईवे, जिला सीमाओं और सीमावर्ती गांवों के आसपास लगातार हो रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि ये इलाके सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। 2 जुलाई 2026 को कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास दोनों गुटों के बीच हुई भारी गोलीबारी में 20 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया था।
उखरुल बना हिंसा का सबसे बड़ा केंद्र
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में उखरुल जिले के लितान गांव में एक मामूली विवाद से शुरू हुआ तनाव धीरे-धीरे बड़े संघर्ष में बदल गया। प्रशासन ने उखरुल को सबसे पहले और लगातार प्रभावित रहने वाले जिले के रूप में चिह्नित किया है। फरवरी से मई के बीच यहां कई हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें बार-बार मौत और घायल होने के मामले सामने आए। जिले में 46 FIR दर्ज की गईं, 150 से अधिक छापेमारी की गई, 42 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
कांगपोकपी भी बना दूसरा बड़ा हॉटस्पॉट
जातीय हिंसा के लिहाज से कांगपोकपी दूसरा सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर सामने आया है। यहां मार्च से शुरू हुई हिंसक घटनाएं जुलाई तक जारी रहीं। इस दौरान मौत और घायल होने के कई मामले दर्ज किए गए। पुलिस ने जिले में 23 FIR दर्ज कीं और 35 से अधिक छापेमारी की। वहीं, 33 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। उखरुल और कांगपोकपी में ही कुल 85 में से 69 FIR दर्ज हुईं, जो इन दोनों जिलों में संघर्ष की गंभीरता को दर्शाती हैं।
केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच और राजनीतिक समाधान की मांग
इस बीच, मणिपुर के एक कुकी-जो संगठन ने सोमवार (13 जुलाई) को दावा किया कि मार्च 2026 से अब तक उग्रवादी गुटों ने आदिवासी समुदाय के कम से कम 15 लोगों की हत्या की है और 14 गांवों में लगभग 55 घरों को आग के हवाले कर दिया है। संगठन ने केंद्र सरकार से इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मणिपुर संकट का जल्द राजनीतिक समाधान निकालने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कुकी-जो इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बाधित होने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित रहने से मानवीय स्थिति और गंभीर हो गई है। साथ ही सभी समुदायों के लिए कानून के तहत समान सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी दोहराई गई है।







