लोकल डेस्क, एन के सिंह।
कानूनन 2 साल की जेल के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 20 हजार प्रति श्रमिक की वसूली होगी।
पूर्वी चंपारण: श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग बिहार के निर्देश पर पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने बाल श्रम के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शनिवार, 7 फरवरी 2026 को मधुबन प्रखंड क्षेत्र में विशेष धावा दल ने सघन जांच अभियान चलाते हुए बाल श्रम की कुप्रथा पर बड़ी चोट की। श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (मधुबन) के नेतृत्व में टीम ने विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अचानक जांच की, जिससे क्षेत्र के नियोजकों में हड़कंप मच गया।
छापेमारी और विमुक्ति की कार्रवाई
जांच अभियान के दौरान मधुबन प्रखंड स्थित दो प्रमुख प्रतिष्ठानों, 'शिव शक्ति स्वीट्स' और 'जय माता दी स्वीट्स' में बच्चों से काम कराए जाने की पुष्टि हुई। धावा दल ने इन दोनों दुकानों से एक-एक, यानी कुल दो बाल श्रमिकों को सुरक्षित विमुक्त कराया। इन बच्चों को तुरंत रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति (CWC), पूर्वी चंपारण के समक्ष पेश किया गया। समिति के निर्देशानुसार बच्चों के बेहतर संरक्षण और देखभाल के लिए उन्हें फिलहाल बाल गृह में भेज दिया गया है।
नियोजकों पर कानूनी शिकंजा
श्रम अधीक्षक रमाकांत ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों से काम कराना 'बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986' के तहत गंभीर अपराध है। दोषी पाए गए दोनों प्रतिष्ठानों के मालिकों के खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कानून के अनुसार, बाल श्रमिकों से कार्य कराने पर नियोजकों को 2 वर्ष तक के कारावास और 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आर्थिक दंड
श्रम विभाग ने केवल कानूनी केस तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। श्रम अधीक्षक ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के आलोक में, सभी दोषी नियोजकों से प्रति बाल श्रमिक 20,000 रुपये की दर से वसूली भी की जाएगी। यह राशि बाल श्रमिक कल्याण कोष में जमा की जाएगी। विभाग ने चेतावनी दी है कि पूर्वी चंपारण जिले के सभी प्रखंडों में यह विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी सूरत में बाल श्रम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संयुक्त टीम का गठन
इस सफल छापेमारी में कई विभागों के अधिकारियों और पुलिस बल का समन्वय रहा। टीम में मधुबन, सुगौली और बनकटवा के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों के साथ-साथ 'प्रयास' संस्था और 'GNK' के प्रतिनिधि शामिल थे। साथ ही, मधुबन थाना के चार पुलिसकर्मी और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) की टीम ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।







