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मन ही आत्मा की दशा व दिशा का निर्धारण करता है: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: वृत्तियों की दशा एवं दिशा का निर्धारण मनुष्य का मन करता है तथा इस मन को ही साध लेने की कला को ही हम साधना कहते हैं।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद्.

रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। माना की सादगी का दौर नहीं पर विश्वास रखें, सादगी से अच्छा कुछ नहीं। जो लोग खुद अपनी गलती नहीं मानते उनसे समय मनवा लेता है। खिचड़ी यदि बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है और यदि दिमाग़ में पके तो इंसान को बीमार कर देती है, इसलिए इंसान को बुरे विचार और गलत सोच से बचना चाहिए। सदैव सकारात्मक सोच ही इंसान को स्वच्छ ओहदा देती है। मूर्ख व्यक्ति की पहचान उसके शब्दों से होती है और एक बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान उसके मौन से होती है  "ईश्वर" से शिकायत क्यों है, ईश्वर ने पेट भरने की जिम्मेदारी ली है, पेटियां भरने की नहीं। ह्रदय कैसे चल रहा है, यह डाक्टर बता देंगे परन्तु ह्रदय में क्या चल रहा है यह तो स्वयं को ही देखना है। आपका दिन कभी खराब नहीं हो सकता, यदि आपकी सोच,आपके विचार,व्यवहार,संस्कार अच्छे हैं और कभी अच्छा दिन नहीं गुजर सकता यदि आपके सोच-विचार,व्यवहार,संस्कार अच्छे या नेक नहीं है।

सदा ह्रदय में शुद्धि रखिये, क्या फर्क पङता है कि असल जिंदगी में हम कैसे हैं, जिसने हमारे प्रति जैसी सोच बना ली है, हम वैसे ही हैं। फैसले हमारी खुशी से होने चाहिए मगर हर फैसले में अपनी खुशी नहीं ढूंढनी चाहिए। चश्मे की फ्रेम मेटल की हो या चांदी की हो या सोने की, महत्व तो उसके अंदर लगे काँच का है जिससे कि हमें दिखाई दे। हमारे तन ढ़कने के लिये कपड़े चाहे कितने ही सुंदर क्यूँ न हो, भारी से भारी ब्राण्ड के क्यूँ न हो, महत्व तो तन के अंदर की रूह का है जिसको ऊपर चढ़ना है न कि कपड़ों को। जिदंगी प्रपोज करती रहती है, छोटी-छोटी ख़ुशियाँ हम स्वीकारते नहीं है और दौड़ते रहते हैं, बड़ी खुशियों के पीछे संतुष्ट रहे तभी खुश रहेंगे।